अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई कतआ

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

आदत ज़रा सुधारो ना

बात बात पर डाँटो मत अब,
बात बात पर मारो ना।
आदत ठीक नहीं है बापू,
आदत ज़रा सुधारो ना।

बिगड़े हुये अगर हम हैं तो,
समझा भी तो सकते हो।
प्यार जता कर हौले हौले,
पथ भी दिखला सकते हो।
साँप मरे लाठी ना टूटे,
ऐसी राह निकालो ना।

ह‌म बच्चे होते उच्छृंखल,
ज़िद भी थोड़ी करते हैं।
थोड़ी गरमी मिले प्यार की,
बनकर मोम पिघलते हैं।
श्रम के फल होते रसगुल्ले,
बिल्कुल हिम्मत हारो ना।

मीठी बोली, मीठी बातें,
बनकर अमृत झरती हैं।
कड़वाहट के हरे घाव में,
काम दवा का करतीं हैं।
राधा बिटिया मोहन बेटा,
कहकर ज़रा पुकारो ना।

हम तो हैं मिट्टी के लौंदे,
जैसा चाहो ढलवा दें,
बनवा दें चाँदी के सिक्के,
या चमड़े के चलवा दें।
दया प्रेम करुणा ममता की,
शब्दावली उकारो ना।

समर भूमि में एक तरफ तुम,
एक तरफ हम खड़े हुये।
तुम भी अपनी हम भी अपनी,
दोनों अपनी ज़िद पर अड़े हुये।
राम बनों तुम फिर से बापू,
फिर लव कुश से हारो ना। 

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

6 बाल गीत
|

१ गुड़िया रानी, गुड़िया रानी,  तू क्यों…

 चन्दा मामा
|

सुन्दर सा है चन्दा मामा। सब बच्चों का प्यारा…

 हिमपात
|

ऊँचे पर्वत पर हम आए। मन में हैं ख़ुशियाँ…

अंगद जैसा
|

अ आ इ ई पर कविता अ अनार का बोला था। आम पेड़…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

किशोर साहित्य कहानी

बाल साहित्य कविता

किशोर साहित्य कविता

बाल साहित्य नाटक

बाल साहित्य कहानी

कविता

लघुकथा

आप-बीती

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं