अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई क़ता

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा वृत्तांत डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य लघुकथा बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट सम्पादकीय प्रतिक्रिया

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

आई होली आई रे

तेरी चूनर हवा में जो लहराई रे
देखो आई होली आई होली आई रे
आज रंग हवा में उड़ा जाए रे
देखो आई होली आई होली आई रे... - 2
 
हाथों में लिए देखो गुलाल हम खड़े हैं
जाओगी कहाँ आज पीछे हम पड़े हैं
बच ना सकोगी तुम मेरे इस रंग से
हम भी हाँ आज अपनी ज़िद पर अड़े हैं -2
 
मुझे देख के तू ऐसे जो शरमाई रे
देखो आई होली आई होली आई रे
तेरी चूनर हवा में जो लहराई रे...
 
झीनी चूनर वाली सुनले ओ अल्हड़ छोरी
रँग दूँगा गाल गुलाबी,  कैसे रहने दूँ मैं कोरी
बाक़ी तो रँगे हैं तन, मेरा रंग तो मन तक जाए 
धीरे से पास आने दो, शोर ना मचाओ गौरी -2
 
तेरी कमर ऐसे जो बलखाई रे 
देखो आई होली आई होली आई रे
तेरी चूनर हवा में जो लहराई रे...
 
मन के मलाल को गुलाल संग उड़ जाने दो
प्रेम का पानी आज, तन पर पड़ जाने दो
अब ना सताओ देखो, मुझको ना तुम ऐसे रोको
प्रेम भरा है मन, मन से मन को मिल जाने दो - 2
 
आज जिया से जिया मिल जाए रे 
देखो आई होली आई होली आई रे
तेरी चूनर हवा में जो लहराई रे...

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

अनगिन बार पिसा है सूरज
|

काल-चक्र की चक्र-नेमि में अनगिन बार पिसा…

अबके बरस मैं कैसे आऊँ
|

(रक्षाबंधन पर गीत)   अबके बरस मैं कैसे…

अम्बर के धन चाँद सितारे 
|

अम्बर के धन चाँद सितारे   प्रथम किरण…

अवध में राम आए हैं
|

हर्षित है सारा ही संसार अवध  में  …

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता

गीत-नवगीत

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं