अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका कविता-सेदोका महाकाव्य चम्पू-काव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई क़ता

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक चिन्तन शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य ललित कला

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा वृत्तांत डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य लघुकथा बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट सम्पादकीय प्रतिक्रिया

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

अरमां है, तुम्हारे दर्दे ग़म की दवा हो जाऊँ

अरमां है, तुम्हारे दर्दे ग़म की दवा हो जाऊँ
कभी फूल, कभी शोला, कभी शबनम हो जाऊँ

 

तुम्हारी आँखों में रचूँ- बसूँ, तुम्हारे दिल में रहूँ
तुमसे दूर होने की सोचूँ, तो तनहा हो जाऊँ

 

तुम अब यह न कहना कि अधूरा हूँ मैं
मुझे बाँहों में भरो, तमन्ना करो कि मैं पूरा हो जाऊँ

 

हर मुहब्बत दुलहन बने, जरूरी तो नहीं
इश्क इबादत है मेरी, कैसे मैं ख़ुदा हो जाऊँ

 

मुझसे हँस-हँस के लोग पूछते हैं नाम तुम्हारा
ख़ुदा का नाम बता दूँ और रुसवा हो जाऊँ

 

तुम्हारा प्यार समंदर है, डूबी जा रही हूँ मैं
रोक लो मुझको इससे पहले मैं फ़ना हो जाऊँ

 

तुम मेरी जान हो, ज़हर दे दो, मगर यह न कहो
यह कैसी बात है, तुम्हारी बात पे ग़ुस्सा हो जाऊँ

 

ग़म ने खुद आके दिया है सहारा मुझको
मैंने कब माँगा था हाय कि मैं उसकी हो जाऊँ

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

1984 का पंजाब
|

शाम ढले अक्सर ज़ुल्म के साये को छत से उतरते…

 हम उठे तो जग उठा
|

हम उठे तो जग उठा, सो गए तो रात है, लगता…

अच्छा लगा
|

तेरा ज़िंदगी में आना, अच्छा लगा  हँसना,…

अच्छा है तुम चाँद सितारों में नहीं
|

अच्छा है तुम चाँद सितारों में नहीं, अच्छा…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता

नज़्म

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं