अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई क़ता

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा वृत्तांत डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य लघुकथा बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट सम्पादकीय प्रतिक्रिया

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

आज़ाद चन्द्र शेखर महान 

वह मातृ भूमि के अमर लाल,
भारत माँ के सच्चे सपूत।
 
आज़ाद चन्द्र शेखर महान,
युग पुरुष कहूँ या देवदूत।
 
भारत माता भी गर्वित हैं,
जनकर उन जैसा वीर पूत।
 
अल्फ्रेड पार्क में चुका दिया,
ऋण मातृभूमि का सहित सूत।
 
भारत माता के मस्तक पर,
निज रक्त तिलक से कर पूजा।
 
जग रानी सीताराम पुत्र,
तुम सा न कोई जग में दूजा।
 
स्वतन्त्रता के दीवानों ने,
इंक़लाब जब बोला था।
 
नवल क्रान्ति की ज्वाला का,
तब हर सेनानी शोला था।
 
नाकों चने चबाया अरि दल,
त्राहि त्राहि तब बोला था।
 
नाक रगड़ कर भागे सारे,
जिस जिस ने विष घोला था।
 
दासत्व तम को नष्ट करने,
था धरणि आया बाँकुरा।
 
शुचि भाबरा में जनम ले,
पावन करी अम्बर धरा।
 
शत्रु की हुँकार सुन कर,
जो न था बिल्कुल डरा।
 
बलिदान से उनके रँगा है, 
ये भारती आँचल हरा।
 
उनको तो अमरत्व मिला,
पर आयु नहीं लम्बी पायी।
 
युग युग तक दुनिया याद करे,
चहुँ ओर कीर्ति जग में छायी।

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

'जो काल्पनिक कहानी नहीं है' की कथा
|

किंतु यह किसी काल्पनिक कहानी की कथा नहीं…

2015
|

अभी कुछ दिनों तक तारीख़ के आख़िर में भूलवश…

2016
|

नये साल की ख़ुशियों में मगन हम सब अंजान हैं…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

हास्य-व्यंग्य कविता

कविता

दोहे

लघुकथा

कविता-मुक्तक

स्मृति लेख

गीत-नवगीत

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं