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भोजपुरी कहानियों की अनुपम भेंट : अगरासन - कृपी कश्यप

समीक्ष्य पुस्तक: अगरासन (कहानी संग्रह)
लेखक: गोरख प्रसाद ’मस्ताना’
प्रकाशक: जे-बी एस पब्लिकेशन (इंडिया)
अंसारी रोड, नई दिल्ली
मूल्य: ₹100

कहानी एक कथात्मक विद्या है जो घटना, भाव, और भावना की शृंखला पर आधारित होती है। कथा-वस्तु जिस भी घटना पर अवलंबित हो लेकिन निश्चित रूप से वह कहानीकार द्वारा निर्धारित उद्देश्य की ओर अग्रसारित होती है। कहानी की विवेचना के लिए उसके तत्व, विचार, शैली, शिल्प, सरंचना और तथ्य आदि का विश्लेषण आवश्यक है।

भोजपुरी कहानी ने लगभग 70 वर्षों का सफ़र तय करते-करते अपने को श्रेणीबद्ध भी किया है- जिसमें समाहित है, यथा, आदर्शोन्मुखी, यथार्थवादी, प्रगतिशील, प्रयोगवादी, मनोवैज्ञानिक, मनोविश्लेषणात्मक, अकहानी और समानांतर कहानी आदि।

सद्य प्रकाशित भोजपुरी कहानी संग्रह अगरासन में कुल 18 कहानियाँ हैं। इस कहानी संग्रह के कहानीकर डॉ. गोरख प्रसाद मस्ताना हैं जो एक सुविख्यात साहित्यकार, लेखक और गीतकार हैं। इस संग्रह में उन्होंने अपनी कहानियों में अनेकानेक विषयों को समेटने की कोशिश की है। इन कहानियों में सामाजिक, परिवारिक, नारी-सशक्तिकरण और धर्म जैसे कई मुद्दे रेखांकित व उद्धृत हैं। 

संग्रह का शीर्षक 'अगरासन' रखने के पीछे का कारण भोजपुरी साहित्य में अपने पूर्व के (predecessors) भोजपुरी साहित्यकारों को अर्पित करने का प्रयास लग रहा है। यह कहानीकार की विन्रमता का सूचक है।

लेखक की रोचक भाषा कहानी संग्रह को दिलचस्प बना देती है। मुख्य तीन धाराओं की कहानियों का संग्रह है यह। एक तरफ़ भावनात्मक कहानियाँ हैं जैसे -सर्वेंट क्वार्टर, बिरधा आसरम, आखिरी साँस, रोटी, देश से और उम्मीद जो हमारे समाज के इर्द-गिर्द घूमती नज़र आ रही हैं। इन कहानियों में हम कहीं कहीं किसी पात्र के रूप में अपने आप को भी महसूस कर पाते हैं। कभी ऐसा लगता है कि इस तरह की कहानियाँ समाज में सुनी-सुनाई या घट रही हैं इसलिए कहा जाता है कि 'कहानी (गल्प) एक रचना है जिसमें जीवन के किसी एक अंग या किसी एक मनोभाव को प्रदर्शित करना ही लेखक का उद्देश्य रहता है। उसके चरित्र, उसकी शैली, उसका कथा-विन्यास, सब उसी एक भाव को पुष्ट करते हैं।

सर्वेंट क्वार्टर में माता-पिता से बच्चों के बिगड़ते रिश्ते और उनके बीच बढ़ती दूरियों की कहानी है, जिसमें एक पिता की अभिलाषा तार-तार हो जाती है इसका जीवंत और मार्मिक चित्रण है। 

आगे की कहानियाँ जैसे संजोग, गरीबी की जिद, लोहा, सखी ऐसी कहानियाँ हैं जो समाज को नई राह और नई सोच के साथ जीने की प्रेरणा देती हैं। लेखक ने अपनी लेखनी से महिला-सशक्तिकरण ज़ोर दिया है। गरीबी की जिद और लोहा ऐसी कहानियाँ है जो महिलाओं के द्वारा समाज में अपनी स्थान को स्थापित करने और संघर्ष की घटनाओं पर आधरित हैं। 

नारी सशक्तिकरण (woman empowerment) आज के समय में समाज को आगे बढ़ाने एवं संबंधों को सँजोने का एक अस्त्र है जिसे लेखक ने जागरूकता के रूप में प्रस्तुत किया है। 

गुरु और शिष्य की मज़बूत परम्परा पर आधारित कहानियाँ गुरु दक्षिणा और पूजा हैं। ये कहानियाँ दर्शाती हैं कि किसी भी सफल छात्र के पीछे उसके गुरु का परिश्रम और त्याग होता है और शिष्यों द्वारा अपने गुरु का सम्मान गुरु के लिए गौरव की बात होती है। आगे दो कहानियाँ किन्नर और हँसुली ऐसी कहानियाँ हैं जो दिल को छू लेती हैं जो यह दर्शाती हैं कि इंसानियत जात-पात, उँच-नीच, अमीर ग़रीब और लिंगभेद से बहुत ऊपर है। किन्नर कहानी पढ़ने के बाद लगता है कि समाज में उनके प्रति जो भेदभाव है वह बिल्कुल निराधार है उसमें वह भी सारी काबिलियत है जो अपनी त्याग और तपस्या से किसी को नया जीवन दे सकते हैं और उसे एक सफल नागरिक बना सकते हैं। किन्नरों का समाज के प्रति ऐसी सोच सराहनीय है जो यह दर्शाती है कि वह भी हम जैसे ही एक सामान्य मनुष्य हैं। 

हँसुली एक ऐसी कहानी है जो सामाजिक रिश्तों को संजीदगी से दर्शाती है। पड़ोसी कहानी पढ़ने के बाद ऐसा लगता है कि समाज में धर्म के आधार पर जो घटनाएँ घट रही हैं वे केवल राजनीतिक रोटी सेंकने मात्र के लिए हैं। असल में, इंसानियत धर्म से ऊपर है। लेखक ने इस कहानी के माध्यम से समाज को जागरूक और सचेत करने की कोशिश की है। कहानी में इंसानियत को सर्वोपरि दर्शाया गया है।

लेखक ने सफलता एवं असफलता, कथनी करनी, संबंधों का मिलना बिछड़ना, नारी के महत्व जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला है। लेखक ने सरल वाक्य रचना, भोजपुरी के सरल शब्दों का प्रयोग बख़ूबी किया है। जिससे पाठकों को पढ़ने और समझने में आसानी होती है। भोजपुरी के शब्दों का चयन और प्रवाहमय शब्दों के इस्तेमाल से कहानियों को रोचक बनाया गया है। वैसे तो संग्रह की ज़्यादातर कहानियाँ पाठक को सोचने के लिए ज़मीन देती हैं तो कहीं-कहीं कहानियों के विषय का दोहराव खटकता भी है। ज़्यादातर कहानियाँ अति-यथार्थवादी और भावनात्मक हैं।

आज के संदर्भ में यदि आप अपनी ख़ामियों में सुधार कर परिवार के साथ, समाज के साथ बढ़ना चाहते हैं तो आपको 'अगरासन' कहानी संग्रह ज़रूर पढ़ना चाहिए। यह कहानी संग्रह पारिवारिक रिश्तों को एक सूत्र में बाँधने में मददगार साबित हो सकता है। इसमें जीवन से जुड़ी कहानी और उदाहरणों की बहुतायत है जो पाठक को बाँधकर रखती है। लेखक ने समाज से जुड़ी समस्याओं और व्यवहारिक समाधान पर भी ज़ोर दिया है। कुल मिलाकर यह कहानी संग्रह समाज को सकारात्मक राह दिखाने का काम करती है।

कृपी कश्यप
गाज़ियाबाद
 

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