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भूख की कालिमा भारी है

चरही से चुट्टूपालू की दूरी
बस वालों से मत पूछो
उनसे पूछो जो ढलती रात के अँधेरों में
भटकती आत्माओं की तरह
बिना पैडल की साईकिल में
ढो रहे हैं कोयले की बोरियाँ


एक तो कोयला खदानों से
उड़ती क्रूर काली धूल
ऊपर से पौ फटने की
बाट जोहती रात का घोर अँधेरा
मुश्किल है बता पाना कि
सबसे काला क्या है

इससे पहले कि सूरज की
पहली किरण रांची पहुँच जाए
जलेबीदार पठारी घाटियों में
चरही से चुट्टूपालू की
चढ़ाई पार कर पहुँच जाना चाहते हैं
बिना पैडल की साईकिल पर
कोयला ढोने वाले ये लोग

अक्सर बड़ी-बड़ी मशीनों तक
तन्त्र के हाथ नहीं पहुँच पाते
और अवैध खनन के इन छोटे
पुर्जों की गिरफ़्तारी हो जाती है
खनन माफ़िया कालिख के धंधे के
सबसे बड़े सफ़ेदपोश हैं
कोयलांचल के अख़बारों में
ख़बरें छपती हैं और
बार-बार बिना पैडल की
साईकिल वाले लोग ही
अवैध खनन में लिप्त पाए जाते हैं
ठीक वैसे ही जैसे नाजायज़ संतानें
सिर्फ औरतों की होती हैं

बहरहाल
झारखण्ड की सियासी सरगर्मियों और
कारोबारी उथल-पुथल से इतर
नेशनल हाईवे तैंतीस की
ऊँची पठारी घाटियों से होकर
पेट की जंग में अँधेरे के विरुद्ध
बिना पैडल की साईकिल वाले
लोगों की मुसलसल यात्रा ज़ारी है
मतलब, कोयले और अंधकार पर
भूख की कालिमा भारी है ।

शब्दार्थ :
चरही से चुट्टूपालू : झारखंड में हजारीबाग से रांची के बीच स्थित दो पठारी घाटियाँ, जहाँ से राष्ट्रीय राजमार्ग तैंतीस घुमावदार चढ़ाई से होकर गुजरता है।

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