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चाँद से मुलाक़ात

चन्दा से एक दिन मुलाक़ात की है
रूपों से मोहित मधुर बात की है
कैसे हो तुम अपने नीले गगन में
धरती पे चाँदी सी बरसात की है! 
 
बच्चों के तुम हो मामा से प्यारे
ज़मीं पर लाने की  ज़िद करते सारे
बेबस हुई माता की दुविधा है न्यारी
कैसे बुलाये अपने अंगन में
जल भर के थाली में तुमको दिखाया
लुटा दी ख़ुशी सारी नन्हे से नभ में॥ 
 
कवियों की दुनियाँ में महिमा अनूठी
चेहरा हो शशि-मुख जैसे गोल अँगूठी
कैसे बताऊँ उपमायें सारी
बने हो इबादत हर व्रत के नारी
पिया चाँद सा हो प्रिया चाँदनी सी
जोड़ी लगे मन को अति भावनी सी॥ 
 
विज्ञान व्याकुल तुम्हारी सतह से
क्या क्या छिपा है अंतर हृदय में 
स्वप्न देखते हैं नया खोजने के
चढ़ते हैं आकाश रॉकेट में प्यारे
लाते हैं मिट्टी सुधाकर उदर की
मिटा देते माटी में सपने हमारे॥ 

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