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वह खाँसता हुआ आया
और 
बैठ गया
नेता जी के पास पड़ी
कुर्सी पर
नेता जी भन्नाए
बोले-
साले, हरामज़ादे 
औक़ात में रह।

वह डरा,
सहमा
और 
बैठ गया
वहीं गीले चौके में
(गोबर और पीली मिट्टी से लीपी गयी भूमि)
नेता जी ने 
पाँव पर पाँव रखा
पॉकेट से सिगार निकाली, जलायी
और एक लंबा कश खींचकर
कहा-
बोल साले, हरामज़ादे
क्या काम है?

भिक्खू ने आँखें मूँद
वह पल याद किया
जब नेता जी गिड़गिड़ाए थे।
चरण गहे थे
और 
धीरे से कहा -
कुछ नहीं हुज़ूर।

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