अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

कोरोना (डॉ. मोहन सिंह यादव)

विश्व में कोरोना ने तबाही मचाई,       
चीन से शुरू जंग, स्पेन पहुँचाई॥१॥ 

 

बुहान से बिहान, जापान रात घहराई,
इटली में महामारी, अमरीका है हिलाई॥२॥


चीन का कोरोना, ब्रिटेन में है भारी,
प्यार में न जीते दे, युद्ध में न हारी॥३॥


विश्व विधाता हे! विज्ञानी बतावा, 
कैसे जीवन रही, अब तू ही सुझावा॥४॥


सब लॉकडाउन रहा, मत अप-डाउन रहा,
सादा भोजन करा, सीधा जीवन रहा॥५॥


जग-जीवन बचावा, अब हाथ न मिलावा, 
करा दूर से प्रनाम, स्व संस्कृति अपनावा॥६॥


धरा धीरज मोहन, उदित होई किरन,    
समय है तो कठिन, पूरा होई मिशन॥७॥

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

अथ स्वरुचिभोज प्लेट व्यथा
|

सलाद, दही बड़े, रसगुल्ले, जलेबी, पकौड़े, रायता,…

अन्तर
|

पत्नी, पति से बोली - हे.. जी, थोड़ा हमें,…

अब बस जूते का ज़माना है
|

हर ब्राण्ड के जूते की  अपनी क़िस्मत…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

हास्य-व्यंग्य कविता

कहानी

सांस्कृतिक कथा

लघुकथा

शोध निबन्ध

कविता

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं