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डर

मुझे सजा सँवार कर
गम्भीरता की चादर डाल कर
फिर से 
बैठा दिया गया
भावी वर के घर वालों के समक्ष
मन में हज़ारों डर और आशंकायें लिए।


उनकी परखती
अन्दर तक बेधती नज़रें
मुझ में ढूँढने लगी 
एक सुन्दर, सुसंस्कृत, शिक्षित आदर्श बहू
घर और परिवार को सम्भालने के गुण 
दहेज की लिस्ट की लम्बाई
और वज़न।


इन सबसे बढ़ कर
मेरे प्रमाणपत्रों में कमाऊ होने के सर्टिफिकेट
और मै स्वयं में सिकुड़ती सिमटती
तूफ़ान के बाद की तबाही से डरती
न चाहते हुए भी ईश्वर से मनाने लगी
कि जाने वाले, पिछलों की तरह
निराशा और उदासी का साम्राज्य 
न छोड़ जायें।
 

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