अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई कतआ

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

एक जांबाज़ की कथा

 द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान जब जर्मन सैनिकों को साइबेरिया के किसी इलाक़े में रूसी सैनिकों ने चारों तरफ़ से घेर लिया तो जर्मन कमांडरों ने अपने सैनिकों को बचाने के लिए हेलिकॉप्टरों का उपयोग किया। ख़ैर, जब एक ऐसा हेलीकॉप्टर एक स्थान पर उतरा तो पायलट ने सैनिकों को बताया कि यह आख़िरी उड़ान है क्योंकि रूसी सैनिक अब नज़दीक पहुँचने वाले हैं। उस जगह पैंतीस जर्मन सैनिक थे जबकि उस हेलीकॉप्टर में मुश्किल से तीस सैनिक घुस पाए। पायलट ने हेलीकॉप्टर से कुर्सियाँ आदि सामान हटा दिया ताकि कुछ और सैनिकों को अन्दर ठूँसा जा सके। सारी कोशिशों के बाद हेलीकॉप्टर के अन्दर चौंतीस सैनिक पहुँच पाए। नीचे सिर्फ़ एक सैनिक बचा था जिसके दोनों घुटने ज़ख़्मी थे। वह हेलीकॉप्टर उड़ान भरने वाला था कि उसके अंदर से एक युवा सैनिक नीचे कूदा और उसने उस ज़ख़्मी सैनिक को सहारा देकर हेलीकॉप्टर के अन्दर पहुँचाया। फिर उसने उस ज़ख़्मी सैनिक से कहा, "मैं तो अभी अविवाहित हूँ लेकिन आपका जाना ज़रूरी है। मैं जानता हूँ आपकी पत्नी और आपके बच्चे आपका
इंतज़ार कर रहे होंगे।"

पायलट ने इंजन स्टार्ट किया और कुछ ही देर में वह हेलीकॉप्टर आसमान में था। पायलट ने उस युवा सैनिक के सम्मान में हेलीकॉप्टर की "डाइव" लगाई। अन्दर मौजूद सभी सैनिकों ने उसे सैल्यूट किया। दुश्मनों के इलाक़े में छूटे उस जांबाज़ युवा सैनिक का क्या हुआ होगा? यह अनुमान लगाना मुश्किल नहीं।

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

अँधेरा
|

डॉक्टर की पर्ची दुकानदार को थमा कर भी चच्ची…

अंजुम जी
|

अवसाद कब किसे, क्यों, किस वज़ह से अपना शिकार…

अंडा
|

मिश्रा जी अभी तक'ब्राह्मणत्व' का…

अंधविश्वास
|

प्रत्येक दिन किसी न किसी व्यक्ति की मौत…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

सांस्कृतिक कथा

लघुकथा

स्मृति लेख

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं