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एक था पिंटू

बच्चो! आज तुम्हें एक ऐसे बच्चे की कहानी सुनाने जा रही हूँ जिसका नाम था पिंटू। वह सात साल का एक नन्हा सा प्यारा सा बच्चा था। उसके पापा भारतीय सेना में एक सैनिक थे। उसकी मम्मी सेना के स्कूल में आया का कार्य करती थीं। वे लोग सेना के सिपाहियों के लिये बने एक क्वार्टर में रहते थे। पिंटू कक्षा एक का छात्र था। वह बहुत होशियार बच्चा था। अपने बड़ों का बहुत आदर करता था और उनकी बात मानता था। वह रोज़ अपने आप नहा-धोकर सुबह तैयार होता था और स्कूल न जाने का कभी बहाना नहीं बनाता था। साफ़-सुथरा रहने के कारण वह अन्य बच्चों की भाँति बार-बार बीमार भी नहीं पड़ता था। वह अपने पापा के साथ रोज़ व्यायाम करता था इस कारण उसका शरीर तंदुरुस्त था। बच्चो! तुमने यह कहावत तो सुनी होगी कि ’स्वस्थ शरीर में स्वस्थ दिमाग़ बसता है।’ पिंटू स्वस्थ रहता था अतः जब वह पढ़ने बैठता या कोई कार्य करता तो उसमें एकाग्र होकर ध्यान लगाता। इस कारण वह हर क्षेत्र में अन्य बच्चों को हरा कर आगे बढ़ जाता। उसके माता-पिता और शिक्षकों को पिंटू के ऊपर बहुत गर्व था। 

एक बार की बात है कि उनकी छावनी में कुछ संदिग्ध आतंकवादी आकर छिप कर रहने लगे। एक दिन एक आत्मघाती हमले में कुछ सैन्य अधिकारी मारे गये। इस हमले में पिंटू के दोस्त चिंटू और चिक्की के पापा भी शहीद हो गये। पिंटू बहुत बहादुर था। वह था छोटा सा बच्चा पर बहुत समझदार था। उसने चिंटू और चिक्की के आँसू पोंछते हुए उनको समझाया–

"मैं छोटा हूँ पर डरपोक और कच्चा नहीं हूँ। मैं क़सम खाता हूँ कि तुम्हारे पापा का मैं बदला लूँगा।"

कुछ लोगों ने इन बच्चों की बातें सुनीं तो सुनकर हँस दिये। व्यंग्य से बोले–

"अच्छा पिद्दी जैसे तुम लोग आतंकवादियों का पता लगाओगे?" 

उनकी बातों को सुनकर चिंटू बिदक गया। पिंटू के पापा ने भी यह सुना तो उन्होंने तीनों बच्चों को बुलाकर समझाया–

“बच्चो! किसी कार्य को करने के लिये हिम्मत और अक़्ल की ज़रूरत होती है। आयु के या शरीर के छोटे-बड़े होने से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता है। तुमने चींटी और चिड़िया की कहानी सुनी होगी।"

चिंटू और उसकी बड़ी बहिन चिक्की बोल पड़े, “अंकल! यह कहानी हमने नहीं सुनी है। प्लीज़ आप कहानी सुना दीजिये।” 

पिंटू के पापा ने कहानी सुनानी शुरू की –

“एक बार एक चींटी नदी में गिर गई। वह नदी की धारा के साथ तेज़ी से बहने लगी। वह अपनी सहायता करने के लिये आवाज़ लगाने लगी। एक चिड़िया पेड़ पर बैठी थी। उसने चींटी को बहते देखा और उसकी करुण आवाज़ सुनी। उसको एक उपाय सूझा। उसने एक पत्ता तोड़ा और उड़ते हुए नीचे आकर चींटी के सामने डाल दिया। जब चींटी उस पत्ते पर चढ़ गई तब चिड़िया ने पत्ते को चोंच से पानी से बाहर निकाल दिया और चींटी की जान बच गई। अब चींटी ने उसे धन्यवाद दिया और कहा कि समय आने पर वह चिड़िया की मदद करेगी। चिड़िया मन ही मन हँसी कि ये इतनी सी चींटी उसकी क्या सहायता करेगी? बच्चो! कुछ दिन के बाद की बात है कि चींटी नदी के किनारे अपने बिल में खाना इकट्ठा कर रही थी कि उसने देखा कि एक शिकारी बंदूक लेकर शिकार करने आया है तभी उसकी नज़र पेड़ के ऊपर गई तो उसने देखा कि वही चिड़िया एक डाल पर बैठी है जिसने उसे बचाया था। शिकारी अपनी बंदूक लेकर चिड़िया के ऊपर निशाना साध रहा है। चींटी ने एक पल का समय गँवाये बिना दौड़कर उस शिकारी के पैर में ज़ोर से काट लिया। शिकारी की गोली तो चली पर निशाना चूक गया और चिड़िया की जान बच गई। इस तरह एक छोटी चींटी भी बड़ा काम कर गई।"

पिंटू बोला, “पापा मैं चिंटू के पापा का बदला लेना चाहता हूँ। क्या मैं यह काम कर सकता हूँ?

पिंटू के पापा बोले, "तुम छोटे हो पर अक़ल के कच्चे नहीं हो। तुम भी सेना के लिये जासूसी का काम कर सकते हो। तुम पर किसी को शक भी नहीं होगा। केवल खेलते समय अपने आँख व कान खुले रक्खो। यदि तुम्हें अजनबी लोग एकांत जगह में या किसी के घर में रात के अँधेरे में आते-जाते दिखाई दें या कहीं पर कोई लावारिस वस्तु पड़ी देखो तो तुरंत मुझे बताना। हो सकता है कि इस तरह से कोई महत्त्वपूर्ण सूचना हाथ आ जाये।"

एक दिन पिंटू, चिक्की और चिंटू परेड ग्राउंड की तरफ़ बने क्वार्टरों की तरफ़ सायकिल से जा रहे थे तो उन्होंने देखा कि दो अजनबी व्यक्ति कैम्पस की फोटो खींच रहे हैं। पिंटू को आश्चर्य हुआ कि इधर की तरफ़ क्वार्टर गार्ड है और इधर सेना के अफ़सरों और कर्मचारियों के अतिरिक्त किसी को आने की अनुमति नहीं है। वहाँ पर लिखा भी था कि आम रास्ता नहीं है। फोटो लेना भी मना था। ये आदमी वहाँ घूम रहे थे और फोटो ले रहे थे। कोई उन्हें मना भी नहीं कर रहा था। पिंटू ने जब घर आकर यह बात अपने पापा को बताई तो इस पर चिंकी को भी याद आया कि उसने भी क्वार्टरगार्ड के पास किसी को घूमते देखा था। उसने याद करके बताया– 

"अंकल! दो दिन पहले मेरे स्कूल के एक लड़के अकरम के पापा क्वार्टर्गार्ड के पास घूम रहे थे।"

“अकरम क्या अपनी छावनी में रहता है?" पिंटू के पापा ने पूछा।

“नहीं पापा। उसने कुछ दिन पहले हमें अपने जन्मदिन में अपने घर पर बुलाया था। वह चौंक में रहता है,” पिंटू बोल पड़ा।

पिंटू की बात सुनकर चिक्की बोली, "अंकल! हम दोनों भाई-बहिन दो-तीन दिन पहले स्केटिंग करते हुए क्वार्टरगार्ड के बगल की सड़क पर निकल गये थे। वहाँ जो पहरे पर गार्ड अंकल थे वह अकरम के पापा से चुपके–चुपके बात कर रहे थे। जैसे ही हमें देखा तो वह चुप हो गये फिर एकदम से अकरम के पापा को डाँट कर बोले– इधर घूमना मना है। भागो यहाँ से"। चिक्की ने आगे बताया, "मुझे उनका व्यवहार कुछ अजीब सा लगा था।"

चिक्की की बात सुनकर पिंटू के पापा चौंक पड़े। उन्होंने पूछा, "तुम लोगों को अकरम के पापा का नाम मालूम है क्या? वह क्या काम करते हैं?"

“हमें नाम या उनका काम तो नहीं मालूम है पर यह मालूम है कि वहाँ आस-पास आतिशबाज़ी बनती हैं," पिंटू ने बताया।

पिंटू के पापा को यह सुनकर संदेह हुआ। कल ही तो किसी ने क्वार्टरगार्ड के पास बने सी.ओ. के दफ़्तर को आत्मघाती हमले में उड़ा दिया था जिसमें एक कर्नल सहित तीन सैनिक शहीद हो गये थे। इनमें चिंटू और चिक्की के पापा भी थे। पिंटू के पापा ने यह सूचना अपने अधिकारियों को दी जो आतंकवादियों एवं उनके संदिग्ध साथियों की खोज कर रहे थे।

बच्चों! तुम्हें यह जानकर आश्चर्य होगा और ख़ुशी भी होगी कि पिंटू, चिक्की और चिंटू की इस साधारण सी जानकारी ने असाधारण काम किया। दो आतंकवादी पकड़े गये और उनके कई साथियों के बारे में जानकारी मिली। जब शरीर स्वच्छ एवं स्वस्थ होता है तो दिमाग़ भी सही काम करता है। छोटा बच्चा भी बड़े-बड़े काम कर सकता है। पिंटू, चिक्की और चिंटू की तरह तुम भी अपने देश के लिये बड़े काम कर सकते हो। 
 

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