अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका कविता-सेदोका महाकाव्य चम्पू-काव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई क़ता

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक चिन्तन शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य ललित कला

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा वृत्तांत डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य लघुकथा बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट सम्पादकीय प्रतिक्रिया

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

घोड़ा और बुज़ु़र्ग

पंजाबी कविता

हिन्दी अनुवाद : सुभाष नीरव

सदियों से
उसकी पीठ पर सवार है
अमानवी वर्ण
यहाँ के धर्म
शैतानी मिथ्या कर्म।

नंगे बदन पर
जब बरसता है चाबुक
वह चलता नहीं
सरपट दौड़ता है
भूल जाता है
कानों में ठुँसी रुई
आँख–पट्टी
मुँह का जाल
ग्रीष्म और शीतकाल।

स्मृतियों
विधानों में बंधा
जिनके दर पर
वह बाहर खड़ा है
वहीं बताते हैं
खुशी की रौ में
फिकरे कसते हैं –
वह सोता है चोरी–चोरी
बैठे कभी देखा नहीं
बस, लिटाये हुए देखा है
जब ठुकती है पैरों में नाल।

घासफूस, बचा–खुचा
फोकट–छिलका खाकर
वह इतना फुर्तीला
कि समय को पछाड़ दे
वह इतना ताकतवर
कि बिजली गश खाये।

और आजकल
वह बार–बार अड़ने लगा है
सीख की तरह खड़ा होने लगा है
और मुझे
अब यों प्रतीत होता है
जैसे वह नीला घोड़ा
मेरा बुज़ुर्ग हो
थके हारे लोक–मन का
केई ताजा सुर हो।

सदियों से
उसकी पीठ पर सवार हैं
अमानवी वर्ण
यहाँ के धर्म
शैतानी मिथ्या–कर्म।
 

 

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

अजनबी औरत
|

सिंध की लेखिका- अतिया दाऊद  हिंदी अनुवाद…

अनुकरण
|

मूल कवि : उत्तम कांबळे डॉ. कोल्हारे दत्ता…

अपनी बेटी के नाम
|

सिंध की लेखिका- अतिया दाऊद  हिंदी अनुवाद…

अपने मठ की ओर
|

अपने मठ की ओर  (पंजाबी कविता) लेखक…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

अनूदित कविता

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं