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हमें भारतवर्ष का उत्कर्ष चाहिए

स्वच्छ तन हो-स्वच्छ मन हो 
स्वच्छ धरा और गगन हो 
स्वच्छता चहुँ ओर ही इस वर्ष चाहिए 

 

रोग न हो और न दुःख 
स्वच्छता में निहित है सुख 
देश के जन-जन में यह विमर्श चाहिए 

 

स्वच्छता पहचान बने 
आन-बान-शान बने 
स्वच्छता की सोच अब सहर्ष चाहिए  

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