अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई कतआ

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

हर युद्ध तू स्वीकार कर - 3

हर अश्रु को हथियार कर, 
हर चुनौती को पार कर, 
हो विजय पथ पर अग्रसर, 
न दासता स्वीकार कर॥


असहाय निर्बल जानकर, 
जो प्राण को निष्प्राण कर, 
था गर्त में तुझे ले गया, 
उसके विरुद्ध आवाज़ कर॥


तेरी देह पर अधिकार कर, 
तेरी अस्मिता तार - तार कर,
जो ख़ुद को कहते श्रेष्ठ हैं, 
हो उठ खड़ी, उनपर वार कर॥


दानव का दर्प तोड़कर, 
तू काल का मुँह मोड़ कर, 
पंकज से तू, पाषाण बन, 
अपरुष का प्रांतर छोड़ कर॥


पट को जो तेरे चीर कर, 
तेरी शीलता को क्षीण कर, 
हैं दंभ से गर्वित खड़े, 
उन नेत्रों को नेत्र नीर कर॥


बन त्रिपथगा  उद्धार कर, 
अरुण प्रिया बन शृंगार कर, 
तू ज्ञान से परिपूर्ण है, 
त्रिनेत्रा बन उजियार कर॥


भय की तू, न आवृत्ति कर, 
स्वयं का तू, स्वामित्व कर, 
अबला नहीं तू,  शक्ति है, 
तू आदि है, ये सिद्ध कर॥


स्थिरता को चरितार्थ कर, 
अयथार्थ को तू, यथार्थ कर, 
कलयुग के दुः शासन विरुद्ध, 
हर युद्ध तू स्वीकार कर॥

हर युद्ध तू स्वीकार कर॥

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

'जो काल्पनिक कहानी नहीं है' की कथा
|

किंतु यह किसी काल्पनिक कहानी की कथा नहीं…

2015
|

अभी कुछ दिनों तक तारीख़ के आख़िर में भूलवश…

2016
|

नये साल की ख़ुशियों में मगन हम सब अंजान हैं…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

नज़्म

कविता

कहानी

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं