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हस्ती इनकी

बीच रास्ते में चलते
कई बार आ घेरती है रेवड़

 

रेवड़, जिसकी भेड़चाल
देखकर मन विमोहित सा
हो उठता है
सिर झुका कर
एक के पीछे एक लग
अनुसरण करते जाना
क्या यही है
इनकी करुण गाथा?

 

रेवड़, जो लिए चलती है
एक कुत्ता, अपने संग
जो चौकसी करता है
रखवाली भी कभी कभी
मार्गदर्शन लेना
वो भी एक कूकर से
क्या नहीं है
भीरूता इनकी?

 

रेवड़, जो धरती पर
भूचाल बन बढ़ती जाती
तनिक टूटी या बिखरी तो
फिर आ जुड़ती
चुम्बक जैसी खींच कर
फिर सट जाती झुंड में
हाँ, यही है
विराट हस्ती इनकी

 

रेवड़ कह लो इनको या झुंड
झुंड में रहना, जीना, खाना
झुंड के पीछे झुंड
दसियों बीसियों नहीं
सैंकड़ों की तादाद में होते हुए
रोक दे जो बहते रास्ते
क्यों कहते हो उसे तुम
एक निरीह भेड़

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