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जन्म दिवस

छत पर अँधेरे में बैठे रामाश्रय जी को याद है कि वे जिस गाँव में पैदा हुए थे, उस ज़माने में उनके यहाँ केक काटकर, मोमबत्तियाँ जलाकर "हैप्पी बर्थडे टू यू" कहने का रिवाज़ तो कतई नहीं था लेकिन उनके जन्मदिन पर उनकी माँ पंडित जी को बुलाकर उनके ग्रह दोषों के निवारण के लिए पूजा करवाया करती थी। जब वे नौ - दस वर्ष के थे तो उन्हें यह अच्छी तरह याद है कि किसी पंडे ने उनकी माँ को बताया था कि ग्रह दोष निवारण के लिए उनके जन्मदिन पर उनके वज़न के बराबर "अन्नदान" होना चाहिए। तब से लेकर जब तक माँ जीवित रही, यह अन्नदान होता रहा। माँ गई और फिर उन्हें याद नहीं कि कभी किसी ने उनके जन्मदिन पर कभी किसी विशेष तरह का आयोजन किया हो। खैर, आज उन्हें बेटे के पास शहर आये लगभग एक महीना होने को आया है कि सुबह उन्हें बेटे से पता चला था कि आज शाम का समय उन्हें छत पर गुज़ारना होगा। दरअसल, इस समय नीचे फ्लैट में उनकी बहू का जन्मदिन मनाया जा रहा है और बेटा जानता है कि ऐसे मौके पर उन्हें कहाँ रहना चाहिए? बेटा सिर्फ यह नहीं जानता कि कभी आज ही के दिन उसकी दादी अन्नदान कर उनका भी जन्मदिन मनाती थी। और अपना न सही, पर अपने इस नासमझ बेटे का जन्मदिन तो वे और उसकी दिवंगत माँ अभी कुछ वर्ष पहले तक हमेशा ही धूमधाम से मनाते रहे हैं।

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