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ख़्वाबों की फ़हरिस्त लगा दी

ख़्वाबों की फ़हरिस्त लगा दी 
ख़ुद ही अपनी नींद उड़ा दी 


दस्तक देकर दरवाज़े पर 
घर की छत दीवार हिला दी 


दिल को रक्खा अंधेरे में 
जिस्मों को रंगीन क़बा दी


पहले चेहरा साफ़ किया फिर 
आईने को धूल चटा दी 


तेरी याद दिलाती थी जो
मैंने वो तस्वीर हटा दी 


फूल खिला तो उठ ख़ुशबू ने 
भँवरों को ये बात बता दी 


आग बहुत थी पहले से ही
दुनियाँ ने कुछ और हवा दी 


जो तेरे रस्ते में आती 
मैंने वो दीवार गिरा दी 


गीली लकड़ी सुलगाई फिर
धीरे-धीरे आग लगा दी
 

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