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कोई सबूत न गवाही मिलती

२२१२ १२२२ २२


कोई सबूत न गवाही मिलती
हक़ माँगते, तबाही मिलती

क्या है जिरह ज़माने वालो अब
किस बात शक़्ल में स्याही मिलती

सहमे दिखे अमन - ईमां वाले
घर मयकदे की सुराही मिलती

नाकामियाँ सिखा देती जीना
किस ख़ास हुनर वाहवाही मिलती
 

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