अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका कविता-सेदोका महाकाव्य चम्पू-काव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई क़ता

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक चिन्तन शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा वृत्तांत डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य लघुकथा बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट सम्पादकीय प्रतिक्रिया

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

क्षमा भाव

जब क्षमा भाव गहराता है
मन करुणामय हो जाता है
उर द्वेष मुक्त हो जाता है
बस गीत ख़ुशी के गाता है! 
हे गुरुवर! सद्ज्ञान प्रभा से
जीना सच में आता है!! 
 
जब क्षमा भाव गहराता है
मन करुणामय हो जाता है! 
 
रोम रोम से क्रोध निकलकर
निर्मल स्व बन जाता है
स्नेह दया अमृत को पीकर
सबको गले लगाता है! 
हे गुरुवर! अनमोल रतन यह
रौशन पथ हो जाता है!! 
 
जब क्षमा भाव गहराता है
मन करुणामय हो जाता है! 
 
प्रेम को विस्तृत करे मनुज जो
अहं स्वयं उड़ जाता है
शुद्ध सरल हृदय को पाकर
क्षमा युक्त झुक जाता है! 
हे गुरुवर! उत्तम दर्शन यह
जग सोना बन जाता है!! 
 
जब क्षमा भाव गहराता है
मन करुणामय हो जाता है! 
 
यदि कोई हो भूल स्वयं से
क्षमा याचना, भाता है
अभय दान दे सब जीवों को
निशदिन मंगल गाता है! 
हे गुरुवर! अनुपम यह जादू
सोये भाग्य जगाता है!! 
 
जब क्षमा भाव गहराता है
मन करुणामय हो जाता है!! 

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

'जो काल्पनिक कहानी नहीं है' की कथा
|

किंतु यह किसी काल्पनिक कहानी की कथा नहीं…

2015
|

अभी कुछ दिनों तक तारीख़ के आख़िर में भूलवश…

2016
|

नये साल की ख़ुशियों में मगन हम सब अंजान हैं…

528 हर्ट्ज़
|

सुना है संगीत की है एक तरंग दैर्ध्य ऐसी…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता

गीत-नवगीत

सामाजिक आलेख

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं