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कुण्डलियाँ - डॉ. सुशील कुमार शर्मा - इतराना, देशप्रेम

1. इतराना
 
इतराते किस बात पर, सुनो घमंडी यार।
अच्छे अच्छे मिट गए, इतराना बेकार।
इतराना बेकार, चार दिन का ये जीवन।
सुंदर रहे न खाल, झुर्रियाँ लटकें तन मन।
कहता सत्य सुशील, फिरो मत तुम लहराते।
हो जाओगे शून्य, चले गर तुम इतराते।
 
2. देशप्रेम
 
माटी में तेरी मिलूँ, अंतिम इच्छा आज।
कोकिल कंठों में बसूँ, बन तेरी आवाज़।
बन तेरी आवाज़, बहूँ बन रेवा नीरा  
बन हिमगिरि का माथ, बनूँ सीमा रणवीरा।
करता नमन सुशील, पुण्य भारत परिपाटी।
अंतिम प्राण प्रयाण, मिलूँ बस तेरी माटी।

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