अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

मच्छर और भ्रष्ट अधिकारी

मच्छर और भ्रष्ट अधिकारी
बीमारी 
दोनों ही फैलाते हैं
एक शरीर में
दूसरा समाज में
मच्छर 
शरीर के पास आता है
समाज 
अधिकारी का चक्कर लगाता है
मच्छर को भय है
एक चपत और लाश गुम
अधिकारी अभय है
क्या कर लोगे
जहाँ जाना है जाओ तुम
मच्छर के भाग्य से 
अपर्याप्त  है मच्छरदानी
अधिकारी के भाग्य से 
पर्याप्त है मनमानी
दोनों ख़ुश रहते हैं 
खाते हैं पीते हैं गुनगुनाते हैं
मच्छर और भ्रष्ट अधिकारी
बीमारी 
दोनों ही फैलाते हैं
 

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

अथ स्वरुचिभोज प्लेट व्यथा
|

सलाद, दही बड़े, रसगुल्ले, जलेबी, पकौड़े, रायता,…

अन्तर
|

पत्नी, पति से बोली - हे.. जी, थोड़ा हमें,…

अब बस जूते का ज़माना है
|

हर ब्राण्ड के जूते की  अपनी क़िस्मत…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

हास्य-व्यंग्य कविता

कविता

बाल साहित्य कविता

नज़्म

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं