अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

नेपथ्य

नेपथ्य का कवि हूँ मैं
अपने अल्फ़ाज़ 
बुन रहा हूँ
घोंसले की माफ़िक 
रोज़ हर रोज़ 
लड़ते हुए 
अनगिनत चरित्रों से
इस छटपटाहट में कि
निकल कर रूबर होऊँ
अपने किरदार के साथ
अपने अंदाज़ के साथ
हो एक लंबा संवाद
मेरे और तुम्हारे साथ
सुनो मुझे देखो मुझे 
यह मैं नहीं एक जमात है
जिसकी एक ही कहानी 
मेरे पास है
खोल रख रहा हूँ
समक्ष तुम्हारे
मानो उधेड़ रहा हूँ
बुनी हुयी स्वेटर
एक छोर पकड़कर
ज्यों उधेड़ती है स्त्री
समझने के लिए डिज़ाइन
अंत में एक अनुभव
तुम्हारे पास होगा 
एक जमात तुम्हारे साथ होगी
मैं शायद नेपथ्य से निकलकर
मंच पर आ जाऊँगा
एक नयी कविता
नए भावबोध
नयी तलाश
नए प्रतिमान
नयी ऊर्जा के साथ
तुम्हारी ही कहानी 
अपने अंदाज़ में 
कह सुनाऊँगा।

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

'जो काल्पनिक कहानी नहीं है' की कथा
|

किंतु यह किसी काल्पनिक कहानी की कथा नहीं…

2015
|

अभी कुछ दिनों तक तारीख़ के आख़िर में भूलवश…

2016
|

नये साल की ख़ुशियों में मगन हम सब अंजान हैं…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता

नज़्म

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं