अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका कविता-सेदोका महाकाव्य चम्पू-काव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई क़ता

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक चिन्तन शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य ललित कला

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा वृत्तांत डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य लघुकथा बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट सम्पादकीय प्रतिक्रिया

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

प्यास

पिछली बार भारत गई, तो उदयपुर देखने की बहुत इच्छा हुई। हफ़्ते भर के लिए वहाँ होटल बुक करवाया और घूमने चली गई। होटल पहुँचते ही रूम सर्विस वाले लड़के ने मेरे दोनों बैग उठाए और कमरे तक छोड़ने आया। सामान रखते हुए बोला, “ लगता है आप कहीं बाहर देश से आईं हैं।"

"जी ठीक पहचाना।"

"कौन देश में रहती है?"

"कनेडा।"

"सुना है, बहुत सुन्दर देश है।" कमरे की बत्ती जलाते हुए लड़के ने बात आगे बढ़ायी, "यह भी सुना है कि बिजली की कोई कमी नहीं वहाँ, और हवा पानी तो एक दम शुद्ध। क्या यह सच है कि पानी अनंत मात्रा में है वहाँ?"

"हाँ, बिलकुल सच!"

"और यहाँ, पीने तक को साफ़ पानी नहीं है मैडम, हर शहर में पानी की बेहिसाब किल्लत है। आप तो बहुत भाग्यशाली हैं ऐसे देश में रहते हैं जहाँ कोई अभाव नहीं।"

"ऐसा नहीं है, किसी ना किसी चीज़ का अभाव तो हर जगह होता है। इतना पानी होते हुए भी हमारे कण्ठ सदा शुष्क ही रहते हैं।"

आश्चर्य चकित सा हो लड़के ने फिर पूछा, "भला वह कैसे?"

"अपनों को मिलने की प्यास से! ऐसी प्यास जो किसी पानी से नहीं बुझती। अपने देश में रहते हुए कम से कम तुम्हारे जीवन में ऐसा अभाव तो नहीं है ना।"

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

अँधेरा
|

डॉक्टर की पर्ची दुकानदार को थमा कर भी चच्ची…

अंजुम जी
|

अवसाद कब किसे, क्यों, किस वज़ह से अपना शिकार…

अंडा
|

मिश्रा जी अभी तक'ब्राह्मणत्व' का…

अंतर 
|

"बस यही तुम में और मनोज में अंतर है,…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता

लघुकथा

कहानी

कविता - हाइकु

पुस्तक समीक्षा

पुस्तक चर्चा

कविता-माहिया

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं