अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

रो रही हस्तिनापुरी

घूमती धरती जतन से बाँधकर अपनी धुरी

कुछ समझ आए न
होगी सेंध कितनी और गहरी
जंग में उलझे हुए हैं
इधर गँवई-उधर शहरी
मुँह कहे श्रीराम पीछे भोंक देता है छुरी

पेड़ के पत्ते झरे सब
कट रही हैं टहनियाँ
तालियाँ हिन्दू बजाते
आरियाँ पकड़े मियाँ
खोल अपने बाल दौड़ीं शक्तियाँ सब आसुरी

बोलियों पर बोलियाँ
बढ़ती गयी ज़िंदा रकम
आज होगा फैसला
है कौन ज़्यादा-कौन कम
मुँह छिपाते हैं पितामह रो रही हस्तिनापुरी

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

अनगिन बार पिसा है सूरज
|

काल-चक्र की चक्र-नेमि में अनगिन बार पिसा…

अम्बर के धन चाँद सितारे 
|

अम्बर के धन चाँद सितारे   प्रथम किरण…

आओ सुबह बनकर
|

मन साँझ -सा बोझिल है, तुम बनके सुबह आओ मेरे…

आज मुझमें बज रहा जो तार है
|

आज मुझमें बज रहा जो तार है, वो मैं नहीं…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

किशोर साहित्य कविता

कविता-मुक्तक

नवगीत

ग़ज़ल

कविता

अनूदित कविता

नज़्म

बाल साहित्य कविता

हास्य-व्यंग्य कविता

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं