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संवेदना

मैं कितना दर्द में हूँ,
इसका मुझे तब यक़ीन हुआ।
जब मैं हाथ बढ़ाता हूँ तेरा हाथ थामने के लिए,
तो मेरे हाथ पर,
आसमां के आँसू थे
शबनम की सूरत में।


सब कुछ का लुट जाना क्या होता है,
मुझे एक रात ने बता दिया..
जब सुबह उठता हूँ मैं
ख़ाली-ख़ाली सा।kavita


बात यह हो चली है लोगों में
तुम्हें मेरी परछाईं से मोहब्बत है?
अरे तुमने मोहब्बत भी की तो किससे,
जो धूप में मेरा साथ छोड़ जाती है।


तुम्हें बस इतना सा दुःख है।
तुमसे मैं कितना अलग हूँ,
तुम्हें क्या पता ऐसे कई ग़म..
मेरे यादों में तारीख़ें बनकर बीत गये हैं।

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