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शरद ऋतु आयी मेरी बगियन में 

श्वेत चाँदनी बिखरी पड़ी है 
ठंडी आहें भरे बावरी बयार 
मेरी काँच की बगियन में 

झूमे अमलतास झूमे मैगनोलिया 
काँच की चादर ओढ़े झूमती धरा 
मेरी श्वेत बगियन में

 काँच की बालियाँ पहने 
थिरकती गुलाब की कोमल पाँखुरी 
मेरी चाँदनी बगियन में 

काँच के कंगन पहनकर 
खनखनाता पत्ता-पत्ता बूटा-बूटा 
मेरी उज्ज्वल बगियन में 

शीतल पौन चूमती 
पत्तियों के ठण्डे कपोलों को 
मेरी दमकती बगियन में 

उत्तरी ध्रुव से झूमती आयी 
शरद की मादक पावन बेला 
मेरी दमकती बगियन में

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