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सुरंगमा यादव हाइकु - 3

1.
नारी न होती
पीड़ाओं को आश्रय
मिलता कहाँ
2.
नारी जीवन
अश्रुजल में खिला
मृदु कमल
3.
दर्द या प्रेम 
जीवन में समाये
ढाई आखर
4.
फूटी कोंपल
कर रहा नर्तन
परिवर्तन!
5.
दिये की बाती
हवा को चूमकर
झूमती जाती
6.
कितने स्वप्न
आशा की चादर में
लिपटे पड़े
7.
बना मकान
मन खण्डहर-सा
रहा वीरान!
8.
निशा सो गयी
अंक में भरकर
साँझ शिशु को
9.
दौड़ा दिवस
थक गयी रजनी
सुबह गाती
10.
चाँद आया तो
उछल पड़ा कैसे!
देखो सागर
11.
नदी विकल
फिर भी न ठहरी
पल दो पल
12.
तम में दीप
काली चादर पर
तरल सोना
 

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