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सुरिंदर मास्टर साहब और पापड़-वड़ियों की दुकान

तिलक नगर के सरकारी स्कूल में
इतिहास पढ़ाने वाले सुरिंदर मास्टर साहब को
मार डाला दंगाइयों ने सन् '84 में

 

पर अब भी जब वहाँ से गुज़रता हूँ
तो लगता है जैसे
वहाँ गुरुद्वारे के पास
पापड़-वड़ियों की अपनी दुकान पर
वड़ियाँ तोल रहे हों
पापड़ पैक कर रहे हों
स्कूल में हमें इतिहास पढ़ाने वाले
सुरिंदर मास्टर साहब

 

हालाँकि जब मैं उन्हें
'सत् श्री अकाल' कहने
उनके पास जाता हूँ तो
ग़ायब हो जाते हैं वे

 

" पुत्तर, बैठ जा
आज हम पढ़ेंगे नादिर शाह का
भारत पर हमला"

 

इतिहास पढ़ाते-पढ़ाते अचानक
एक दिन स्वयं इतिहास बन गए
सुरिंदर मास्टर साहब

 

बीसवीं सदी के आठवें दशक में
एक मनहूस दिन, दर्जनों नादिर शाहों ने
उन्हें पकड़ कर उनके केश कतल किए
फिर उनके गले में टायर डाल कर
उन्हें ज़िंदा जला दिया
यह ख़बर सुन कर
मैं कई दिनों तक
तेज़ बुख़ार में तपता रहा

 

जैसे इतिहास पढ़ाते समय
उसमें डूब जाते थे
सुरिंदर मास्टर साहब
वैसे ही पापड़-वड़ियों में
उनकी आत्मा बसती थी
आज भी पापड़-वड़ियाँ खाते हुए
मेरी आँखें भीग जाती हैं

 

मेरी स्मृतियों में
अब भी धड़कते हैं
सुरिंदर मास्टर साहब --
वे जो तिलक नगर के
सरकारी स्कूल में
हमें इतिहास पढ़ाते थे
वे जो प्यार से
'पुत्तर' कह कर
हमें बुलाते थे
और जिनकी पापड़-वड़ियों का
स्वाद अद्भुत था

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