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तेरी तस्वीर

मैंने अब तक नहीं देखा है तुझे जान-ए-बहार
रोज़ तस्वीर बनाता हूँ तेरी
तेरी बातों की लकीरों से बनाता हूँ इसे
और फिर भरता हूँ इसमें तेरी आवाज़ के रंग
तू है सच, तेरा सरापा सच है
तेरे लफ़्ज़ों से मुहब्बत की महक आती है!
 
तेरी बेबाक अदाई है अजब जाँ लेवा
कितने दिलकश हैं तेरी बातों के ये तीखे नुक़ूश
तेरी ख़ामोशी के पहलू भी उजागर उसमें
तेरी हल्की सी झिझक भी है नुमायाँ उसमें
फिर भी हँसने की खनक साफ़ नज़र आती है!
 
गो कि है अपने तसव्वुर पे बहुत नाज़ मुझे
काश तू उस से भी बेहतर निकले!

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