अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई कतआ

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

विकट और जनहीन जगह में

पेड़ों से कुछ दूर खड़ा है,
झुरमुट में वह बनजारा,
विकट और जनहीन जगह में.
 

खिसक रही हैं चुपके-चुपके,
रातें, कंबल ओढें,
सूरज संभव है भूला हो,
अपने गतिविधि-मोढें,

 

प्रेम-गीत आलाप रहा है,
वय-वृंदावन आवारा,
विकट और जनहीन जगह में.
 

पगडण्डी के आसपास हैं,
फूलों के चंडोले,
नदी किनारे कोयल के स्वर,
कुहू-कुहू रस घोले,

 

बाँस स्वयं बाँसुरी बजाते,
धुन-तुमड़ी का इकतारा,
विकट और जनहीन जगह में.

 

हेमकूट-शैलेय शिखर पर,
ध्यान-मग्न संन्यासी,
झरनों की लहरों में गुंजित,
झर-झर बारहमासी.

 

बैठ नीम तर छेड़ रहा है
ताल कहरवा, मछुआरा,
विकट और जनहीन जगह में.

 
स्वच्छ गगन है और बादलों
का है बिलकुल टोटा,
हुआ सबेरा चला नहाने,
राम-नाम का लोटा,

 

कहाँ छिपा है नीलगगन में,
ध्रुव-दर्शन का ध्रुवतारा,
विकट और जनहीन जगह में।

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

अनगिन बार पिसा है सूरज
|

काल-चक्र की चक्र-नेमि में अनगिन बार पिसा…

अबके बरस मैं कैसे आऊँ
|

(रक्षाबंधन पर गीत)   अबके बरस मैं कैसे…

अम्बर के धन चाँद सितारे 
|

अम्बर के धन चाँद सितारे   प्रथम किरण…

अवध में राम आए हैं
|

हर्षित है सारा ही संसार अवध  में  …

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

गीत-नवगीत

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं