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प्रिय मित्रो,

आज आपके साथ कुछ समाचार साझे करना चाहता हूँ। "दलित साहित्य विशेषांक" बहुत सफल रहा। आशा से भी अधिक सहयोग मिला। साहित्य कुञ्ज में विशेषांक प्रकाशित होने का अर्थ है कि यह विषय का आरम्भ है अंत नहीं। यानी जब भी कोई इस विशेषांक में अपनी रचना जोड़ना चाहेगा वह इस विशेषांक का भाग बनती जाएगी। साहित्य कुञ्ज में विशेषांक का उद्देश्य किसी विषय विशेष से संबंधित अधिक से अधिक साहित्यिक जानकारी, साहित्य को एकत्रित करना है ताकि एक ही स्थान पर उस विषय का भण्डार बन सके। समय आने पर विषय के गंभीर पाठक या शोधार्थियों को एक ही पोर्टल पर यह सब उपलब्ध हो सके। इसी शृंखला में अगला विशेषांक "फीजी का हिन्दी साहित्य" होगा। आप सबसे निवेदन है कि इस विषय पर आप जो भी साहित्यिक योगदान कर सकते हैं उसका स्वागत है।

दूसरा जो बड़ा समाचार आप तक पहुँचाना चाहता हूँ कि दो दिन पहले यानी 28 सितम्बर को साहित्य कुञ्ज का व्हाट्सएप समूह आरम्भ किया है जिसका स्वागत बहुत गर्मजोशी के साथ साहित्य कुञ्ज के लेखकों और पाठकों ने किया है। थोड़ा रोमांचित भी हूँ क्योंकि सम्भावनाओं के नए द्वार दिखने लगे हैं। सदस्य और प्रतिभागी मंच पर अपनी रचनाएँ लिखित रूप, वीडियो और ऑडियो में प्रस्तुत कर रहे हैं और उन पर वैचारिक प्रतिक्रिया भी आरम्भ हो रही है। मेरी कल्पना थी कि एक ऐसा सौहार्दपूर्ण मंच हो जहाँ सामूहिक ऊर्जा परिष्कृत साहित्य सृजन में सहायक हो। मैं ऐसे कई साहित्यिक मंचों का विघटन देख चुका हूँ। निस्संदेह इसी कारण सशंकित भी हूँ चिंतित भी क्या हम सब मिल कर इस उद्देश्य को प्राप्त कर सकेंगे। क्योंकि हर व्यक्ति जो ऐसा मंच प्रारंभ करता है उसका उद्देश्य भी यही होता है - कोई भी असफल होने के लिए मंच आरम्भ नहीं करता।

मेरा मानना है कि किसी भी कला का कलाकार मौलिक रूप से स्वतन्त्र प्रवृत्ति का प्राणी होता है। वह अपनी कला की उत्कृष्टता को किसी बंधन में बँध कर प्राप्त नहीं कर सकता। भाव कब बँधे हैं! इसीलिए इस मंच पर कम से कम नियम प्रतिबंध और नियम रखे हैं। सबसे शालीनता बनाए रखने की सविनय अपेक्षा है। राजनैतिक और धार्मिक विवादों को इस मंच से दूर रखने का आग्रह किया है। रचनाओं की अभिव्यक्ति किसी भी तकनीकी माध्यम से की जा सकती है। मेरा पूर्ण विश्वास है कि इस मंच के सदस्य सभी अन्य सदस्यों का शुभ चाहते हैं तो शुभ संध्या और सुप्रभात के संदेशों की कोई आवश्यकता नहीं रह जाती। बस – अभी इससे अधिक कोई नियम यह प्रतिबंध नहीं हैं। हाँ एक और – इस मंच पर व्यंग्य और हास्य का साहित्यिक संदर्भ में स्वागत है - व्यर्थ की चुटकलेबाज़ी तो हर जगह मिलती है। शेष ज्यों-ज्यों हम आगे बढ़ेंगे हम सब मिलकर इस मंच को दिशा देंगे। हो सकता है कि कभी पलट कर नई दिशा निर्धारित करने पड़े। जब तक हम साहित्य को सही दिशा और स्तरीय सुधार देने में सफल होते हैं तो हम सही राह पर हैं।

आप सभी से अनुरोध है कि अपने सभी साहित्यिक मित्रों (लेखकों और साहित्य प्रेमियों) को इस मंच से जुड़ने के लिए आमंत्रित करें। सभी का स्वागत है।

 — सुमन कुमार घई
 

टिप्पणियाँ

कमलेश गोंड 2021/10/12 07:55 PM

उत्कृष्ट कार्य के लिये बधाई गोंडवाना दर्शन मासिक पत्रिका सम्पादक मण्डल सदस्य

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