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डॉ. गंगा प्रसाद बरसैंया

डॉ. गंगाप्रसाद गुप्त ‘बरसैंया’
सतना (म.प्र.)
जन्म स्थान: भौंरी, जिला बाँदा, (अब चित्रकूट) उ.प्र.
जन्म तिथि: फरवरी, 1937
योग्यता: एम.ए. (हिन्दी), पीएच.डी. (जबलपुर वि.वि. से ‘हिन्दी साहित्य में व्यक्तिवादी निबन्ध और निबन्धकार’ विषय पर सन् 1964)
प्रकाशित कृतियाँ: 

अन्य प्रकाशन: लगभग 200 शोधपरक निबन्धों का देश की प्रतिष्‍ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशन तथा अनेक ग्रन्थों का संकलन। समय-समय पर अनेक शोध पत्रिकाओं, स्मारिकाओं व ग्रन्थों का सम्पादन। 
साहित्यिक सम्बद्धता: अनेकों साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन व साहित्यिक संस्थाओं से सम्बन्ध। 
सम्मान: महामहिम उप-राष्‍ट्रपति डॉ. शंकरदयाल जी शर्मा द्वारा अ.भा. भाषा साहित्य सम्मेलन की ‘साहित्य श्री’ उपाधि से सम्मानित तथा सम्मेलन द्वारा सर्वोच्‍च राष्ट्रीय अलंकरण ‘भारत भाषा भूषण एवं सरस्वती सम्मान’ के साथ अनेकों सम्मानों व पुरस्कारों से अलंकृत। 
प्रशासनिक अनुभव: 40 वर्षों तक हिन्दी के आचार्य, विभागाध्यक्ष एवं स्‍नातक व स्‍नातकोत्तर प्राचार्य, म.प्र. शासन के उच्‍च शिक्षा विभाग के अन्तर्गत महाविद्यालयीन सेवा के अन्तर्गत। केशव अनुसंधान केंद्र, ओरछा के दो वर्ष संचालक रहे।

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लेखक की पुस्तकें

  1. विक्रम बिलगैंया कृत सुदामा चरित्र