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ISSN 2292-9754

पूर्व समीक्षित
वर्ष: 22, अंक 299, जून द्वितीय अंक, 2026

संपादकीय

यह आवश्यक तो नहीं है कि मित्रों के साथ केवल साहित्य की ही बात की जाए!
सुमन कुमार घई

  प्रिय मित्रो, इस समय कैनेडा में 15 जून के रात्रि के लगभग 9 बज चुके हैं। अभी तक मैं साहित्य कुञ्ज का अंक प्रकाशित नहीं कर पाया हूँ। पिछले एक घंटे से एक ही प्रश्न से जूझ रहा हूँ कि इस बार सम्पादकीय किस विषय पर लिखूँ? मस्तिष्क एक सपाट कोरे पन्ने की तरह हो रहा है। कुछ भी सूझ नहीं रहा। कम से कम साहित्य से सम्बन्धित तो कुछ भी नहीं। फिर भी लिखना तो कुछ पड़ेगा ही। मेरे कम्प्यूटर की मेज़ दूसरी मंज़िल के एक कमरे की खिड़की से सामने है। बाहर अभी अंधेरा नहीं हुआ है। अभी दिन बड़े हो रहे हैं इसलिए आज...

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साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

कहानियाँ

आख़िरी पेड़ का इंटरव्यू
|

  पृथ्वी पर केवल एक पेड़ बचा था। उसे…

आत्मबोध
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  आँगन में क़दम रखते ही अपना वर्षों…

आख़िरी फ़ैसला
|

  माइक से गूँजती शहनाई की मधुर धुन…

चोखेलाल
|

  आज जब भारतीय रेस्टॉरेंट में खाने…

तुम्हारे सारे इल्ज़ाम मुझे मंज़ूर हैं
|

  अहमदाबाद के प्रसिद्ध एल.डी. आर्ट्स…

यादों का बैंक
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  शहर में एक नया बैंक खुला—“यादों…

हास्य/व्यंग्य

आलेख

सत्य की ताक़त
|

  सत्य एक ऐसा तत्त्व है जिसको हर समय…

समीक्षा

अमानवीकरण को उकेरती कहानी
|

  डॉ. शैलजा सक्सेना की कहानी ‘डियर जैनी . . .’ की समीक्षा…

संस्मरण

सरेंडर पॉलिसी
|

  मैंने सपने में भी नहीं सोचा था कि…

नाटक

दो कौड़ी बनाम फूटी कौड़ी
|

 (नाटिका) पात्र परिचय   ज्ञानदेव:…

साक्षात्कार

रूट्स की बातें (साक्षात्कार) इला प्रसाद जी के साथ
|

लोकप्रिय एवं बहुचर्चित साहित्यकार इला प्रसाद…

कविताएँ

अधूरे जज़्बात
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  मैं मंदिर गया मैं मस्जिद गया मेरी…

आदमी की तलाश
|

  आदमी सारी दुनिया घूम आया,  पर…

आस्था 
|

  बढ़ती जाती है एक-एक सीढ़ी चढ़ …

ईश्वर का सानिध्य
|

  हठात् अपने प्रतिबिंब को  दर्पण…

करुणा
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  जब शब्द साथ छोड़ देते हैं, …

कह-मुकरियाँ
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मुझको देता शीतल छाया।  देख उसे मन बहुत…

किरण एक आशा की ‘माँ’
|

  तुमने सारा जीवन समर्पण किया हमारे…

गाँव की शाम
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  गाँव की शाम में एक अलग ही शान्ति…

गुरुकुल की हो साधना
|

दोहे गुरुकुल की हो साधना, विज्ञानी का ज्ञान। …

चिन्ता
|

  तुम ताना दो तुम गाली दो,  पर…

छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार
|

  छपकर बिकते थे कभी, सच के थे अख़बार, …

छोटा सा आकाश
|

  किसी को पूरा संसार नहीं चाहिए होता, …

जीने की कहानी 
|

  दावा नहीं करती दवा,  रोग मिटाने…

जीवन
|

  जीवन एक लंबी यात्रा है।  यहाँ…

दीपक
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  दीपक सूरज नहीं बनना चाहता। …

धरती के लिए एक कविता
|

(विश्व पर्यावरण दिवस पर)    कंक्रीट…

नदी
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  नदी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। …

निज़ाम फतेहपुरी–दोहा–003
|

1. कॉकरोच पार्टी बनी, बाॅंट रही है ज्ञान। …

नोट कहाँ कब बोलते, करते सिक्के शोर
|

  नोट कहाँ कब बोलते, करते सिक्के शोर। …

पचास पार का स्त्री मन
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  पचास पार की औरतें अचानक बूढ़ी नहीं…

पथिक 
|

(सॉनेट)    अगनित कष्टों में तप…

पर्यावरण पर दोहे
|

  काटे वन, फिर ढूँढ़ते, छाया शीतल ठाँव। …

पृथ्वी
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  पृथ्वी सबकी माँ है।  वह किसी…

बनकर साहूकार वो, करने चले सुधार
|

  जिनके सिर है पाप की, ब्याज समेत उधार। …

बूढ़ा पेड़
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  गाँव के बाहर एक बूढ़ा पेड़ खड़ा है। …

मधु शर्मा – दोहे – 001
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1 कानपुर में जन्म हुआ     …

मन पर लाख सवाल
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  तीस दिनों के दर्द में, बने न जिसकी…

मनुष्य का घर
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  मनुष्य सारी उम्र एक घर बनाता है। …

महत्वाकांक्षाएँ
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  सिर उठाकर महत्वाकांक्षाएँ मेरे भीतर…

मैं सिंधी हूँ 
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  मैं सिंधी हूँ,  हाँ! मैंने कभी…

मैंने कटते देखा है
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  नन्हा-सा वह बीज लगा है, पेड़ अभी…

मौन
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  मौन ख़ालीपन नहीं होता।  उसमें…

यह चाहत 
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  उस नन्ही चाहत का नाम है बचपन …

रागिनी मैं-मैं की 
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  जब भी लोग रागिनी मैं-मैं की गाएँ, …

संक्षिप्त हो जाऊँ
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  संक्षिप्त हो जाऊँ इतना भी नहीं कि…

समय का पेड़
|

    समय किसी पेड़ की तरह बढ़ता…

समय के सामने
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  समय किसी राजा का मित्र नहीं, …

सुकून की तलाश
|

  तप्त धरा को सुकून मिलता,  वर्षा…

सूरज दादा 
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  सूरज दादा, सूरज दादा  क्या आपको…

स्मृतियाँ
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  कुछ स्मृतियाँ पुरानी किताबों की तरह…

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शायरी

ज़ख्म दिल के अब किसी को भी दिखाना है नहीं
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  फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन फ़ाइलुन…

जिनकी हर एक दलीलों पे फ़िदा होते रहे
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  रमल मुसम्मन सालिम मख़बून महज़ूफ़ फ़ाएलातुन…

हम फ़क़त आइना दिखाते हैं
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ख़फ़ीफ़ मुसद्दस मख़बून महज़ूफ़ मक़तू फ़ाइलातुन…

कवि, स्वर, चित्र और निर्माण: अमिताभ वर्मा

उसका क्या

अमिताभ वर्मा की भावपूर्ण अभिव्यक्ति। उच्चारण से ’क्या’ शब्द के कितने भाव प्रस्तुत हुए—सुनें—उन्हीं…

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इक्कीसवीं सदी की कहानियाँ

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डॉ. आरती स्मित (विशेषांक संपादक)

  इक्कीसवीं सदी वैश्विक स्तर पर बहुआयामी बदलाव एवं विकास की जननी के रूप में हमारे सम्मुख आई। विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में जो अद्भुत क्रांति आई, उसने जीवन की गति तेज़ कर दी। कंप्यूटर, इंटरनेट, स्मार्ट फ़ोन, आइ फ़ोन, सोशल मीडिया के कई विकल्पों सहित गूगल और चैट जीपीटी ने विश्व के आम जन को विश्व.. आगे पढ़ें

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