ISSN 2292-9754
पूर्व समीक्षित
वर्ष: 22, अंक 292, फरवरी प्रथम अंक, 2026
संपादकीय
किससे दिल की बात कहूँ?
सुमन कुमार घईप्रिय मित्रो, इस बार पुनः अंक प्रकाशन में दो दिन का विलम्ब हो गया। 14 जनवरी को कुछ रचनाएँ ऐसी आईं जो कि समय-संवेदी थीं। जैसे कि मकर-संक्रांति से संबंधित रचनाएँ अगर तेरह-चौदह को भी मिलेंगी तो भी उन्हें समय रहते तो प्रकाशित करना ही पड़ेगा। “साहित्य कुञ्ज की पुस्तकें” की पुस्तकों के अंश प्रायः अंतिम दिन के लिए छोड़ता हूँ। चौदह की दोपहर वही करता रहा। सम्पादकीय नहीं लिखा गया। सोचा पन्द्रह की सुबह को लिख लूँगा क्योंकि मैं साढ़े तीन बजे उठ ही जाता हूँ। भारत में पन्द्रह की दोपहर के बाद पाठकों को अंक मिल जाएगा। कल संध्या अर्थात् चौदह की संध्या को हिमपात...
साहित्य कुञ्ज के इस अंक में
कहानियाँ
छींके पर चढ़ा पकड़ा गया चोर: नाम है पनीर
कहानी | वीरेन्द्र बहादुर सिंहजब से नेताओं ने सफ़ेद टोपी पहननी…
हास्य/व्यंग्य
एक सौभाग्यशाली बीवी के पति की मृत्युकथा
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी | अशोक गौतमसच मानिए! गंद में रहकर, गंदा पानी…
कंडक्टर ने सीटी बजाई और फिर कलाकार बनकर डंका बजाया
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी | वीरेन्द्र बहादुर सिंहलखनऊ बस डिपो में मैं बरेली…
गाँव का खंडहर सामुदायिक भवन
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी | मुकेश गर्ग ‘असीमित’हे पथिक, ज़रा ठहर! हाँ, तू ही . . . वही…
जनसंख्या नियंत्रण: अब कोई योजना नहीं, बस हालात
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी | प्रीति सुरेंद्र सिंह परमारभारत में जनसंख्या नियंत्रण अब कोई…
लघुकथा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड
हास्य-व्यंग्य आलेख-कहानी | दिलीप कुमारजंबो द्वीप के बीचों-बीच आधी रात को…
आलेख
आज स्वामी विवेकानंद की जन्म जयंती: धर्म और भक्ति, युवा पीढ़ी, श्रद्धा, महिला जगत तथा भारत के भविष्य के बारे में उन्होंने क्या कहा . . .
सामाजिक आलेख | वीरेन्द्र बहादुर सिंहमहात्मा गाँधी के सिद्धांतों और उनके…
ग्लोबल वर्कफ़ोर्स में जेन-ज़ी: एक कंपनी में औसतन 13 महीने की नौकरी
सामाजिक आलेख | वीरेन्द्र बहादुर सिंह‘अप्प दीपो भवः’ इस पाली-संस्कृत…
जय सोमनाथ: तलवार की धार, इतिहास का आकार, अस्मिता का चीत्कार
ऐतिहासिक | स्नेहा सिंहकहा जाता है कि दक्ष प्रजापति की 27…
नयी शिक्षा नीति 2020 के आलोक में भारतीय ज्ञान प्रणाली
शोध निबन्ध | आनंद दासश्री आनंद दास सहायक प्राध्यापक, श्री रामकृष्ण…
मकर संक्रांति: एक विराट सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विमर्श
सांस्कृतिक आलेख | सुशील कुमार शर्मा(मकर संक्रांति पर विशेष-सुशील शर्मा) …
मकर संक्रांति: पतंगबाज़ी, आनंद, संस्कृति और चेतना
सामाजिक आलेख | सत्यवान सौरभमकर संक्रांति का पर्व भारतीय संस्कृति…
मुक्त छंद रचनाओं में आज की हिंदी
साहित्यिक आलेख | सुशील कुमार शर्माहिंदी और समय का अटूट सम्बन्ध सज्जनों,…
विलासिता: बदलती हुई दुनिया में परिभाषा की पुनर्रचना
सामाजिक आलेख | तेजपाल सिंह ’तेज’जब हम विलासिता की बात करते हैं, तो…
सुख की चाबी मत ढूँढ़ो, ताला किसी ने लगाया ही नहीं
चिन्तन | वीरेन्द्र बहादुर सिंहभगवान ने भक्त से कहा, “जा,…
स्वामी विवेकानंद: आधुनिक भारत के आध्यात्मिक महाप्राण
सामाजिक आलेख | सुशील कुमार शर्मा(विवेकानंद जयंती पर विशेष) …
हिंदी साहित्य को विद्रोही स्वर प्रदान करने वाले कथाकार: ज्ञानरंजन
साहित्यिक आलेख | संदीप सृजनस्मृति शेष- ज्ञानरंजन हिंदी साहित्य की दुनिया…
समीक्षा
दलित समाज की पीड़ा को व्यक्त करती कविताएँ
पुस्तक समीक्षा | खान मनजीत भावड़िया 'मजीद’पुस्तक: बंद दरवाजे (दलित-चिंतन की कविताएँ) कवि: जयपाल प्रकाशन:…
संस्मरण
इतिहास से साक्षात् भेंट: योगवीर हांडा अंकल की स्मृति में
स्मृति लेख | मंजुश्री वेदुलाआदरणीय योगवीर हांडा अंकल एक सौ तीन…
कविताएँ
कुण्डलिया - डॉ. सुशील कुमार शर्मा - मकर संक्रांति - 002
कविता-मुक्तक | सुशील कुमार शर्मा1 संगम तट पर स्नान कर, धो लो मन के…
माता–पिता की वृद्धावस्था: एक मौन विलाप
कविता | प्रीति सुरेंद्र सिंह परमारवृद्धावस्था— जो कभी अनुभव का…
शायरी
कवि, स्वर, चित्र और निर्माण: अमिताभ वर्मा
उसका क्या
अमिताभ वर्मा की भावपूर्ण अभिव्यक्ति। उच्चारण से ’क्या’ शब्द के कितने भाव प्रस्तुत हुए—सुनें—उन्हीं…
विडिओ देखेंइस अंक की पुस्तकें
दिल से ग़ज़ल तक
ग़ज़ल
2. दिल से ग़ज़ल तकः एक…
3. एक ख़ुशगवार सफ़र-दिल से…
4. दिल से ग़ज़ल तक अज़, देवी…
5. मेरी ओर से—दिल से ग़ज़ल…
6. 1. सफ़र तय किया यारो…
7. 2. सागर के तट पे आते…
8. 3. सुन सको तो सुन लो…
9. 4. न जाने क्यों हुई…
10. 5. ज़िन्दगी करना बसर…
11. 6. ग़लत फ़हमी की ईंट छोटी…
12. 7. माफ़ कैसे गुनह हुआ…
13. 8. इल्म होगा उसको फिर…
14. 9. हमसफ़र बिन है सफ़र…
15. 10. ग़म कतारों में खड़े…
16. 11. कहाँ हैं गए सारे…
17. 12. रौशनी की ये नदी…
18. 13. मिट्टी को देके रूप…
19. 14. राज़ की है बात जो…
20. 15. तेरे दर पर टिकी…
21. 16 . शमअ पर वो था जला…
22. 17. ये हमराज़ को उसने…
23. 18. बेवफ़ा से मुलाक़ात…
24. 19. कल जली जो ग़रीबों…
25. 20. वो है रहता ख़फ़ा…
26. 21. होगा विश्वास उन…
27. 22. भीड़ में वो सदा…
28. 23. है ये अनजान सा सफ़र…
29. 24. शायरी इक इबादत है
30. 25. हिफाज़त में हैं…
31. 26. फिर तो सब राज़ होंगे…
32. 27. तेरे मेरे बीच वो…
33. 29. कैसी ख़बरें हैं ये,…
34. 30. बादशाहत है कहीं…
35. 31. क्या करता है तेरी…
36. 32. कहीं सर किसी का…
37. 33. शोर में भी ख़फ़ा…
38. 34. होती बेबस है ग़रीबी…
39. 35. उसे ले आई जो शक्ति,…
40. 36. नया रंग हो नया ढंग…
41. 37. ईंट-गारा हर तरफ़…
42. 38. जब भी बँटवारे की…
43. 39. क्यों बात को बढ़ा…
44. 40. हैवानियत के सामने…
45. 41. साँसें जो ज़िन्दगी…
46. 42. बने बेवफ़ा राज़दाँ…
47. 43. ख़ुदी आस्माँ को लगी…
48. 45. लिखी बात दिल की…
49. 46. जीत पाने की वजह…
50. 47. चमकती है बिजली यूँ…
51. 48. इश्क में जब वो किसी…
52. 49. वह किसी का भी क़र्ज़दार…
53. 50. लिखा जो तुमने क़लाम…
54. 51. क्या ऐसा कोई किताब…
55. 52. वहीं पे आता उबाल…
56. 53. थरथराया रात भर तेरा…
57. 54. हो न बस में तेरे…
58. 55. तू न था कोई और था…
59. 56. ख़ाली दिल का मकान…
60. 57. इन चरागों को जलना…
61. 58. शीशे के घर में जो…
62. 59. अनकही जो बात दिल…
63. 60. शिल्पी ने तराशी…
64. 61. मिट्टी को देके रूप…
65. 62. कोई बैठा मुझमें…
66. 63. काश उसका भी अपना…
67. 64. नये रंग निस दिन…
69. 66. उजालों की बारात…
70. 67. बारहा उसके घर गया…
71. 68. मुँह के बल फिर…
72. 69. अँधेरी सी गली में…
73. 70. अपनों की दोस्ती…
क्रमशः
डॉ. आरती स्मित (विशेषांक संपादक)
इक्कीसवीं सदी वैश्विक स्तर पर बहुआयामी बदलाव एवं विकास की जननी के रूप में हमारे सम्मुख आई। विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में जो अद्भुत क्रांति आई, उसने जीवन की गति तेज़ कर दी। कंप्यूटर, इंटरनेट, स्मार्ट फ़ोन, आइ फ़ोन, सोशल मीडिया के कई विकल्पों सहित गूगल और चैट जीपीटी ने विश्व के आम जन को विश्व.. आगे पढ़ें
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