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सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा यात्रा वृत्तांत डायरी रेखाचित्र बच्चों के मुख से बड़ों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य लघुकथा बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

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ISSN 2292-9754

पूर्व समीक्षित
वर्ष: 22, अंक 293, मार्च प्रथम अंक, 2026

संपादकीय

अब मैं मौन नहीं हूँ
सुमन कुमार घई

  प्रिय मित्रो,  इस विलम्बित अंक प्रकाशन के समय सम्पादकीय मौन है।  कहने को बहुत कुछ है और विडम्बना है कि कह भी नहीं पा रहा हूँ। कोविड के बाद पहली बार भारत लौटा हूँ। एयरपोर्ट पर विमान से बाहर निकलने से लेकर अभी तक के अनुभव आपस में प्रतिस्पर्धारत हैं कि कौन-सा पहले पन्ने पर उतरेगा। एयरपोर्ट के पार्किंग लॉट के रख-रखाव से चकित और प्रभावित होने के अनुभव को लिखूँ या एयरपोर्ट के परिसर से बाहर निकलते ही ट्रैफ़िक की पारम्परिक चिल्ल-पौं के बारे में लिखूँ? मुझे और पत्नी को एयरपोर्ट पर लेने आए ड्राइवर से हुई बातचीत का लिखूँ या दिल्ली के समृद्ध इलाक़े में...

आगे पढ़ें

साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

कहानियाँ

अंतिम ऑनलाइन
|

  वह वृद्ध शिक्षक अपने छोटे से कमरे…

अंतिम बीज
|

  एक था गाँव जहाँ कभी हरियाली अपने…

अंतिम फ़ैसला 
|

  पीहू मोहित की दीदी थी। पीहू का रंग…

उथल-पुथल 
|

  उस शनिवार सुधाकर जब दफ़्तर से लौटा,…

काग़ज़ का जंगल
|

  नगर के मध्य एक प्राचीन पीपल का वृक्ष…

किसका जीवन परिपूर्ण 
|

  बड़ी सी कोठी में रहने वाले एक दम्पती…

जल देवता का क्रोध
|

एक गाँव एक बड़ी और पवित्र नदी के किनारे…

डायन
|

  वह रात के भयानक सन्नाटे में, पहाड़…

डियर जैनी . . . 
|

  2020, अक्टूबर 25   प्रिय जैनी, …

तसल्ली
|

  झील के किनारे खड़े कुत्ते के आगे…

दस सेकंड का फ़ैसला
|

ट्रेन अभी चली नहीं है। भीड़भाड़ वाली ट्रेन,…

नाख़ून
|

  प्राथमिक कक्षा के विद्यार्थी, हाथ…

प्रेम सम्मान
|

  क़स्बे के उस पुराने सरकारी कन्या विद्यालय…

प्लास्टिक का जंगल
|

एक तटीय क़स्बा था, जहाँ के लोग मछली पकड़कर…

बारिश और हवा
|

  बारिश को सलाम किया। न भी करता तो…

बूढ़ी गाय
|

  गाय भी शहर आ गई है। देखते हो ना सड़क।…

बूढ़े दिन
|

  फ़ोन की घंटी बज रही थी। कई सालों…

बग़ावती
|

  “मैं सिनेमा जा रही हूँ,”…

मर्यादा का प्रेम
|

  वेलेंटाइन दिवस था। नगर के कैफ़े,…

मौन पहाड़ का बदला
|

  ऊँचे-ऊँचे हिमखंडों से घिरा एक छोटा…

राख के बाद
|

  वर्ष 2137 लेकिन धरती अब भी जल रही…

रावण की लकड़ी
|

  जैसे ही रावण के पुतले को आग लगी;…

वो पाँच मिनट
|

  ​गाँव की पक्की सड़क पर सर्राटे भरती…

स्मृतियों के अवशेष
|

  उस पुराने पुश्तैनी मकान के बरामदे…

स्वार्थ की लक्ष्मण रेखा
|

  रात के भोजन की मेज़ पर सन्नाटा पसरा…

हादसा
|

  दो सौ रुपये डब्बे में यूँ ही पड़े…

क़ुदरत का क्रोध
|

  वर्ष 2098 में पृथ्वी अपने इतिहास…

हास्य/व्यंग्य

गाइड सर
|

  प्रीति पीएच. डी. करना चाहती है। उसको…

माफ़ी की दुकान
|

  देवियो और सज्जनो, ये बरस बीत गया।…

फ़्रेंडुआ बैरी हो गए हमार 
|

  फ़्रेंडो! फ़्रेंड ने फ़्रेंडों की भर्ती…

आलेख

किताबें मेरा सुख और मेरी विपदा
|

मूल मराठी लेख का हिंदी अनुवाद:  विजय…

घनन घनन घंटा बाजे . . . 
|

  स्वतंत्रता के बाद से हमारे देश के…

प्रकाशमयी अंधकार
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  क्या हर वह इंसान जो मुस्कुरा रहा…

वीर बाल दिवस 
|

  वीर बाल दिवस वीर बाल दिवस हर वर्ष…

शब्दों से परे एक दिन
|

  भारतीय संस्कृति में पर्व केवल पंचांग…

समीक्षा

ग़ज़ल की परंपरा और ‘बग़ैर मक़्ता’ का स्थान
|

किताब का नाम: बग़ैर मक़्ता (ग़ज़ल संग्रह)  ग़ज़लकार: अमित धर्मसिंह पृष्ठ:…

मधुरता और मिठास के साथ मुद्दों पर लिखा गया गीत 
|

समीक्षित पुस्तक: जहाँ नहीं उजियार गीतकार: योगेंद्र प्रताप मौर्य …

ज़िन्दगी जिन्दाबाद: पीड़ा के विरुद्ध ज़िन्दगी की घोषणा
|

पुस्तक: ज़िन्दगी जिन्दाबाद (आत्मकथा)  लेखक: डॉ. कुमारेन्द्र सिंह सेंगर …

संस्मरण

पागल नहीं, बीमार हूँ
|

  13 जनवरी 2026 कल ऑफ़िस से लौटते समय…

बेटी का जन्म
|

  जनवरी के महीने में उस दिन (18 जनवरी)…

वे गुनगुने पल 
|

  समय की अठखेली जितना बूझो, कुछ अनबूझ…

अन्य

कविताएँ

अधूरी किताब, रुके हुए सपने
|

  छोटी‑सी वो लड़की है,  मन में…

अनकहा इश्क़
|

  मैं जानती हूँ  तुम सब जानते…

अनसुईया
|

  जनम हुआ,  जुड़वाँ आया—…

अब घिर आए सावन भी
|

  अब घिर आए सावन भी,  हृदय पर…

आत्मबोध
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  अपनों में ही गिराने की आज़माइश है, …

आस बनाए रखता है
|

  आस बनाए रखता है,  धैर्य जीत…

आहट
|

  मेरे क़दमों की आहट से  वर्तमान…

इंसान हो जाना चाहता हूँ
|

  मैं स्वाभिमान में माउंट एवरेस्ट चढ़…

ईश्वर गणित है
|

  ईश्वर गणित है गणित, प्रारंभ और अंत…

उड़ान
|

  वह हाथ फैलाकर,  ऊपर की ओर उछलता…

उषा का आगमन
|

  उषा की आ रही है सवारी नवगीत गा रही…

एक दलित 
|

  एक दलित!  जब पढ़ लिखकर क़ाबिल…

एक दूरी बनाए रखता है
|

  एक दूरी बनाए रखता है,  मन ही…

एक सीट ख़ाली है
|

  (दुर्घटना में मृत बेटे के लिए माँ…

कंठ भर गीत
|

  कंठ भर गीत गाने दे।  हर वीणा…

कमअक़्ल कौन
|

  थूक दिया है खाट पर ही उल्टी कर देती…

कल क्या होगा?
|

  आज निकला सूर्य अम्बर से, सुहानी दोपहरी…

किसे जगाएँ
|

  सुलग रहा है मन के भीतर घाव पुराना…

कोहरा
|

  कोहरे को देखकर डर सा लगता है  …

कोहरे में 
|

  कोहरे में मैं कुछ दूर चला  …

कौन करे मन की अगवाई
|

  ठिठक गए छंदों के नूपुर मौन पड़ी मन…

क्या तुमने कविता लिखी
|

  क्या तुमने लिखा है  मन के समंदर…

क्या हैं हम . . .? 
|

  जब रिश्ते करें परेशान,  तो बदलना…

ख़ामोशी 
|

  कैसे कह दूँ  तुम ही ग़लत थे…

खोया वो सतरंगी फागुन 
|

  पथ में हाय कहीं खो गया, मेरा वो सतरंगी…

गणतंत्र का नया व्याकरण
|

  न मैं शब्दों का सौदागर, न मैं कोई…

घर
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  मैंने देखा है कंकड़ों पत्थरों पीतल…

चेतना का उत्तरायण
|

  सूर्य आज केवल दिशा नहीं बदलता, …

जब प्यार मरने लगता है
|

  आँधी-तूफ़ानों में जो प्यार खड़ा रह…

जवाब तैयार रखना
|

  जवाब तैयार रखना,  सिलसिले वार…

जीवन संघर्ष
|

  जीवन में है बहुत-कुछ  जीवन—यों…

डूब जाना ही प्रेम है 
|

नदी लहर-लहरकर चलती है जैसे तुम चला करती…

तब क्या होगा
|

  जब हम ज़िन्दा रहेंगे और एक दिन अचानक…

तीर्थराज प्रयाग
|

  तीर्थ राजा कहे जो गये।  घाट…

तुम कमज़ोर नहीं हो
|

  मैं जानता हूँ सोने की देहलीज़ के…

तुम समझते हो
|

  तुम समझते हो कोरी राजनीति है यह। …

तुम्हारा यथार्थ
|

  बहता जा रहा है जीवन किसी नदी की भाँति…

तेरहवीं का रायता
|

  शक्ल पर बेशर्मी की चादर ओढ़े, …

दिमाग़ 
|

  मेरे गाँव के लोगों में  दिमाग़…

दृश्य
|

  वह नाक रगड़ता रहता था अनुनय विनय करता…

धिक्कार है तुम पर!
|

धिक्कार है तुम पर,  मेरी कोशिशों ने…

नया स्वप्न 
|

  हे मृत्यु!  लिखता हूँ मैं जीवन …

पन्ना धाय
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  पन्नाधाय ने निश्चय कर के एक बड़ा…

परीक्षा की घड़ी
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  परीक्षा की घड़ी आई।  सोचो बच्चो…

पिता का पता
|

  पिता कोई संबोधन भर नहीं होता वह एक…

प्रकृति और जीवन
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  टूटकर गिरती पत्तियों ने  परिवार…

प्रकृति की गोद में
|

  प्रकृति स्रोत है जीवन का,  ज़रिया…

प्रथम प्रेम का रंग
|

  बसंती हवाओं के साथ खिल उठे हैं पुष्प…

प्रेम ही विस्तार है
|

  यही सच्चा त्योहार है।  मानवता…

फरवरी
|

  प्रेम के गीत गाती है ये फरवरी। …

बदलाव
|

  अश्रुओं ने निकलना छोड़ शब्दों को गढ़ना…

बहुआयामी कविताएँ
|

  कविताएँ केवल शब्दों का अनुशासन नहीं…

बहुत याद आता है . . . 
|

  बहुत याद आता है . . .  पाँच-दस…

बादल
|

  हे बादल!  अब तो बरसो भू-गर्भ…

बासंती सी पवन चलती
|

  बासन्ती सी, पवन चलती, क्यारियाँ हैं…

बाज़ार के शोर में
|

  हमने सच के मरुस्थलों में ढूँढ़ी हैं…

बिकाऊ साहित्यकार 
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  मैं  बिकाऊ साहित्यकार हूँ साहब …

बिट्टो, तुम थकना मत
|

  बिट्टो,  तुम्हारी आँखों में…

मधुमास वसंत पर दोहे
|

  आया नव मधुमास फिर,  चूनर बनी…

मन . . . मनु . . .मनुष्य—
|

  (महाकवि जयशंकर प्रसाद की जयंती पर) …

मयंक शर्मा – सवैया – किशोरी छवि वर्णन
|

कंचन हार हमेल लसै मुख, भानुलली सम चन्द-चकोरी,…

माँ आशुतोषी नर्मदा
|

  अनादि के मौन से जब सृष्टि ने प्रथम…

माटी
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  माटी से जुड़ जा मानव,  माटी…

यही तो समाज है!
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  ये जातिवादियों का समाज है—…

ये फरवरी
|

प्रत्येक फरवरी अपने संग ले आती है फिर कोई…

ये सारे सतरंगी रंग
|

  ख़ुशी में डूबे रंग खिलखिला रहे हैं…

रीढ़
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  झुकती है कभी तनती है अच्छी लगती है…

लिखते हुए
|

  कितना अच्छा लगता है उसके बारे में…

वेद नहीं, वेदना पढ़ो
|

  वेदों की चर्चा बहुत, मंचों पर दिन-रात। …

वेलेंटाइन दिवस पर
|

  आज का दिन केवल गुलाबों का उत्सव नहीं, …

शब्द
|

  तुमने शब्दों में हथेलियाँ रख दीं, …

शाम मुक्ति वाली है
|

  शाम मुक्ति वाली है,  ध्यान की…

शाश्वत प्रेम
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  तुम वो फूल हो जिसको मैं बिना स्पर्श…

शिव वंदना
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  त्रिपुरारि के सम्मुख झुक कर अंतर…

शिव वंदना
|

  त्रिनेत्र दीप दाहकं, तमोमलं विनाशकं!…

शिव संदेश
|

  दूर कैलाश से जब शिव स्वर गूँजे, …

श्रवण-धाम महोत्सव
|

  सृष्टि जगत के श्रद्धालु जन …

संयोग या साज़िश
|

तीर्थयात्रा पर जाते हुए लोगों को घूमने जाते…

सखी
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  चाँद तले,  अँधेरे–उजाले…

समय की धमनियों में बहता हुआ सत्य
|

  यह कैसा समय है जहाँ मनुष्य अपनी ही…

सरस्वती वंदना 
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हे माँ,  कहीं कोई शब्द मन के कोने में…

सवर्ण हैं हम
|

  सवर्ण हैं हम पर किसी सिंहासन पर बैठे…

सावधानी के बीच चूक
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सावधानी ओढ़े मैं चलता हूँ हर मोड़ पर, …

सीख टोपी की
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  बेटा, सुन लो आज पिता का अनमोल अनुभव,…

सुकून की छत
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  खुले आसमान की छत,  धरती का बिछौना। …

स्त्री रूप माँ
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  माँ तुम महान हो इसलिए नहीं कि तुम…

स्वर्ग की लोलुपता
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  स्वर्ग की लोलुपता,  इस धरा को…

हम ही हैं, भारत के मतदाता
|

(राष्ट्रीय मतदाता दिवस)   हम भारत हैं। …

हे प्रिये! 
|

  हे प्रिये!  प्रेम कितना सुंदर…

होड़ से परे फ़क़ीरी में ठहरा मन
|

  आज मन कुछ रुका, कुछ ठहरा सा है, …

होली: कभी रंग की-कभी ख़ून की . . . 
|

  होली आती है तो केवल गुलाल नहीं लाती, …

<

शायरी

अख़बारों में
|

  जो छप जाए अख़बारों में हर वो लफ़्ज़…

इतने भीगे हम भी तनहा यादों की बरसात में
|

रमल मुसम्मन महज़ूफ़   फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन…

इल्ज़ाम
|

  एक इल्ज़ाम  मेरे नाम आया है …

उसकी इसकी मिट्टी देखो तो
|

  थोड़े बहुत जो ख़्वाब बचे हैं, …

एक शरारत से देखना उनका
|

  एक शरारत से देखना उनका,  देखता…

कभी न भूलने वाला एहसास
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(दया और सादगी)    ज़िंदगी की राहगुज़र…

घर
|

  मजबूरी थी मेरी कोई बहाना न था, …

दास्ताँ झूठों की
|

  दास्ताँ झूठों की सच्ची कहानी हो गई, …

प्यार नहीं तुझसे अब
|

  प्यार नहीं तुझसे अब, ये बात दिल ने…

मेरी क़लम की आन तिरंगा
|

  धुँधली आँखों काँपते हाथों धीमे क़दम…

रह गई
|

  कहते-कहते मेरी बात रह गई,  छोड़…

वो किसी उम्मीद पे मायूस सा मिलता न था
|

  रमल मुसम्मन महज़ूफ़ फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन…

वो बातें मन की थीं, और कमाल थीं
|

  वो बातें मन की थीं, और कमाल थीं खेतों…

सनम मेरी मंज़िल हो तुम
|

  भले चाहे मुश्किल हो तुम सनम मेरी…

ख़ास मौसम का बुलावा हमें आया होता
|

  रमल मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़ मक़तू फ़ाएलातुन…

कवि, स्वर, चित्र और निर्माण: अमिताभ वर्मा

उसका क्या

अमिताभ वर्मा की भावपूर्ण अभिव्यक्ति। उच्चारण से ’क्या’ शब्द के कितने भाव प्रस्तुत हुए—सुनें—उन्हीं…

विडिओ देखें

इस अंक की पुस्तकें

दिल से ग़ज़ल तक


2. दिल से ग़ज़ल तकः एक…
3. एक ख़ुशगवार सफ़र-दिल से…
4. दिल से ग़ज़ल तक अज़, देवी…
5. मेरी ओर से—दिल से ग़ज़ल…
6. 1. सफ़र तय किया यारो…
7. 2. सागर के तट पे आते…
8. 3. सुन सको तो सुन लो…
9. 4. न जाने क्यों हुई…
10. 5. ज़िन्दगी करना बसर…
11. 6. ग़लत फ़हमी की ईंट छोटी…
12. 7. माफ़ कैसे गुनह हुआ…
13. 8. इल्म होगा उसको फिर…
14. 9. हमसफ़र बिन है सफ़र…
15. 10. ग़म कतारों में खड़े…
16. 11. कहाँ हैं गए सारे…
17. 12. रौशनी की ये नदी…
18. 13. मिट्टी को देके रूप…
19. 14. राज़ की है बात जो…
20. 15. तेरे दर पर टिकी…
21. 16 . शमअ पर वो था जला…
22. 17. ये हमराज़ को उसने…
23. 18. बेवफ़ा से मुलाक़ात…
24. 19. कल जली जो ग़रीबों…
25. 20. वो है रहता ख़फ़ा…
26. 21. होगा विश्वास उन…
27. 22. भीड़ में वो सदा…
28. 23. है ये अनजान सा सफ़र…
29. 24. शायरी इक इबादत है
30. 25. हिफाज़त में हैं…
31. 26. फिर तो सब राज़ होंगे…
32. 27. तेरे मेरे बीच वो…
33. 29. कैसी ख़बरें हैं ये,…
34. 30. बादशाहत है कहीं…
35. 31. क्या करता है तेरी…
36. 32. कहीं सर किसी का…
37. 33. शोर में भी ख़फ़ा…
38. 34. होती बेबस है ग़रीबी…
39. 35. उसे ले आई जो शक्ति,…
40. 36. नया रंग हो नया ढंग…
41. 37.  ईंट-गारा हर तरफ़…
42. 38. जब भी बँटवारे की…
43. 39. क्यों बात को बढ़ा…
44. 40. हैवानियत के सामने…
45. 41. साँसें जो ज़िन्दगी…
46. 42. बने बेवफ़ा राज़दाँ…
47. 43. ख़ुदी आस्माँ को लगी…
48. 45. लिखी बात दिल की…
49. 46. जीत पाने की वजह…
50. 47. चमकती है बिजली यूँ…
51. 48. इश्क में जब वो किसी…
52. 49. वह किसी का भी क़र्ज़दार…
53. 50. लिखा जो तुमने क़लाम…
54. 51. क्या ऐसा कोई किताब…
55. 52. वहीं पे आता उबाल…
56. 53. थरथराया रात भर तेरा…
57. 54. हो न बस में तेरे…
58. 55. तू न था कोई और था…
59. 56. ख़ाली दिल का मकान…
60. 57. इन चरागों को जलना…
61. 58. शीशे के घर में जो…
62. 59. अनकही जो बात दिल…
63. 60. शिल्पी ने तराशी…
64. 61. मिट्टी को देके रूप…
65. 62. कोई बैठा मुझमें…
66. 63. काश उसका भी अपना…
67. 64. नये रंग निस दिन…
69. 66. उजालों की बारात…
70. 67. बारहा उसके घर गया…
71. 68.  मुँह के बल फिर…
72. 69. अँधेरी सी गली में…
73. 70. अपनों की दोस्ती…
74. 71.  मुस्कुराहट मेरी…
75. 72. बाग़ में उनका तो…
76. 73. आईना है दिखा रहा…
77. 74. एक तुम हो एक मैं…
78. 75. नये साल का है आना…
79. 76. ज़रा पत्थरो ध्यान…
80. 77. मुंतशिर हो ज़ेहन…
81. 78. साँस का ईंधन जलाकर…
82. 79. मेरी नब्ज़ छू के…
83. 80. लगती है मन को अच्छी,…
क्रमशः

इस अंक के लेखक

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इक्कीसवीं सदी की कहानियाँ

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डॉ. आरती स्मित (विशेषांक संपादक)

  इक्कीसवीं सदी वैश्विक स्तर पर बहुआयामी बदलाव एवं विकास की जननी के रूप में हमारे सम्मुख आई। विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में जो अद्भुत क्रांति आई, उसने जीवन की गति तेज़ कर दी। कंप्यूटर, इंटरनेट, स्मार्ट फ़ोन, आइ फ़ोन, सोशल मीडिया के कई विकल्पों सहित गूगल और चैट जीपीटी ने विश्व के आम जन को विश्व.. आगे पढ़ें

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