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सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

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बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य लघुकथा बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

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ISSN 2292-9754

पूर्व समीक्षित
वर्ष: 22, अंक 296, मई प्रथम अंक, 2026

संपादकीय

साहित्य में इतिहास के साथ कितनी छेड़-छाड़ अपेक्षित है?
सुमन कुमार घई

प्रिय मित्रो, बहुत पहले संभवतः एक या दो सम्पादकीयों में मैंने ऐतिहासिक कथा साहित्य के विषय पर अपने विचार आपके साथ साझा किए थे। इस बार भी इसी विषय पर, दो कहानियों के आधार पर, आप से एक चर्चा आरम्भ करना चाहता हूँ। मेरी इच्छा है कि यह केवल एक सम्पादकीय न होकर बल्कि एक संवाद का आरम्भ हो। मेरे जो भी विचार हैं वह मैं आपके समक्ष रखने जा रहा हूँ। आपके विचार प्रतिक्रिया या आलेख के रूप में पढ़ने की प्रतीक्षा रहेगी। मैं ऐतिहासिक-कथा कैसे परिभाषित करता हूँ—यहीं से चर्चा आरम्भ करते हैं। क्या ऐतिहासिक कथा एक साधारण कहानी हो सकती है जिसे केवल ऐतिहासिक बनाने...

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साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

कहानियाँ

अपशकुन
|

  उस दिन सुनीता ने दृढ़ निश्चय कर लिया…

आँसू ताक़त हैं कमज़ोरी नहीं
|

  पिता के निधन के बाद आरव महीनों तक…

आख़िरी नामांकन
|

  गाँव नक़्शे में छोटा था, पर वहाँ रहने…

आख़िरी सिक्का
|

  भोर पूरी तरह उजली नहीं हुई थी। …

इन गुड फ़ेथ
|

  सन्‌ उन्नीस सौ उनसठ के उस दिन…

एक झूठ
|

  झूठ छोटा हो या बड़ा, जब उजागर होता…

ख़ानुम–अमर
|

  “इतिहास के पन्नों में षड्यंत्रपूर्वक…

चुप्पी का विद्रोह
|

  गाँव का नाम था बिसनपुर। अब वह पहले…

टायर की ख़रीद
|

  धूप कड़क थी। आसमान में दूर-दूर तक…

पीड़ा बनी कर्तव्य
|

  शहर में बाढ़ आई थी। सब अपना सामान…

बँटवारा
|

  “एक एक चीज़ का बँटवारा होना…

बहाना
|

  वह दफ़्तर जाने के लिए गाँव के बस अड्डे…

भगदड़
|

  मुहल्ले के लोग फागू की लाश को घेर…

मैं हूँ ना
|

  गाडरवारा शहर की उस संध्या में आकाश…

रक्त-बीज की सीढ़ियाँ
|

  धूप अभी पूरी तरह फूटी नहीं थी। वह…

रेत का आदमी
|

  विवेक हर असफलता पर टूट जाता था। नौकरी…

वहम का भँवर
|

  “बड़ी बहन, एक काम करना पड़ेगा,”…

वेलकम टू लाइफ़
|

  सुबह के ठीक दस बजे थे। महल्ले की…

संस्कारी बहू
|

  उद्धव के यहाँ दो-तीन दिनों से बिल्कुल…

सफ़र
|

  ऐसी फ़र्स्ट क्लास डब्बे में जैसे ही…

स्मृति के रंग
|

  होली की सुबह थी। आँगन में धूप ऐसे…

हम ज़िंदा हैं
|

  “यह सामान बाहर रखने का है,…

हास्य/व्यंग्य

आलेख

एक आत्म स्वीकरण
|

  डोनाल्ड ट्रंप मेरे लिए केवल एक राजनीतिक…

क्या मालूम! 
|

  कभी-कभार हमें जो दिखाई दे रहा है,…

समीक्षा

हाइकु, ताँका और सेदोका के आलोक में ‘गंगा में तैरते मिट्टी के दीये’
|

समीक्षित पुस्तक: पुस्तक: गंगा में तैरते मिट्टी के दीये काव्य संग्रह हाइकु,…

कविताएँ

अँधेरे में छिपा दीप
|

  जिसके जीवन में अंधकार उतरता है शायद…

अनकहा आलोक
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  वह शब्दों की उजली थाली लेकर प्रेम…

आज का समय, युद्ध और साहित्य
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  आज का समय एक अजीब सी ख़ामोशी में डूबा…

उड़ने की आशा
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  सामने था आकाश किसी ने कहा था …

एक गीत सुनाना है
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  एक गीत सुनाना है,  दिल को जलाना…

एक रंग जीवन का
|

  एक रंग जीवन का,  एक ढंग सावन…

कैसे हम ख़ुद को समझाएँ
|

  कैसे हम ख़ुद को समझाएँ क्या हमको आभास…

क्या दोस्त फिर रहेंगे हम
|

  क्या दोस्त फिर रहेंगे हम समय निकल…

घर अब भी जाता हूँ . . .
|

  घर अब भी जाता हूँ,  वही आँगन,…

घाव का उपहार
|

  मुख में मधु की धार लेकर जो मिलें…

घास का उगना 
|

  दुनिया की सबसे कमज़ोर चीज़ों में गिनी…

घास 
|

बारूदी ज़मीन पर घास उगने लगी है  चींटिंयाँ…

चिड़िया
|

  चिड़िया सुबह सबसे पहले उठती है और…

जीने की प्रतीक्षा में जीवन
|

  मनुष्य कभी सचमुच जीता नहीं वह केवल…

डॉ. अम्बेडकर
|

  आग लगी थी जातिवाद की,  छुआछूत…

नगरी-नगरी फिरता है
|

नगरी-नगरी फिरता है,  दिल दिन-सा जलता…

नयी दृष्टि
|

  वह दिन अब कुछ दूर नहीं जब दृष्टि…

पृथ्वी की पुकार
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(पृथ्वी दिवस पर कविता)    समय…

प्रेम जीवित रहता है
|

  क़समें साथ ले जाने की  साथ अनंत…

बात करता है सच्चाई की
|

  बात करता है सच्चाई की,  बिना…

ब्रह्म-घोष
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(अक्षय तृतीया पर कविता)   अक्षय पुण्य…

भीमराव अम्बेडकर
|

  आओ मिलाए आज तुम्हें,  भारत की…

मछली, जल और जाल
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  मछली का जीवन जल है,  जल ही उसका…

माँ पीताम्बरा बगलामुखी वंदना
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  आज का दिन साधना की पीली आभा में स्नात…

माँ बगलामुखी स्तवन
|

(नाराच छंद:)   नमो नमो सुपीत वर्ण दिव्य…

मुस्कान 
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  (सॉनेट)    करो युद्ध यदि…

मृत्यु का इंतज़ार 
|

  मृत्यु का इंतज़ार  क्या यह भय…

मैं मधुवन बन जाता हूँ
|

  मैं मधुवन बन जाता हूँ तुम गाय चराने…

लू-लपटें
|

  लू-लपटों का राज है।   …

विष और शिव के मध्य
|

  जिसके हिस्से में विष आया है उसके…

शयन-नियम
|

  शयन समय से हो सदा, हो रजनी जब ढाल। …

शरीर घट में
|

  शरीर घट में,  आत्मारूपी—…

शिव वंदना
|

  त्रिनेत्र दीप दाहकं, तमोमलं विनाशकं!…

साहस का उजाला
|

  अदृश्य हर डर होगा,  जब भीतर…

सुना है गाँव में
|

  सुना है गाँव में,  सुबह के समय, …

स्कूल चलो अभियान 
|

  चलो चलें स्कूल प्रेम से कुल का मान…

<

शायरी

उन्हें पाने के बाद 
|

  साथी मिला मगर न मिल गया सा लगता…

जो यूँ नाज़-ए-उल्फ़त में खोते फिरोगे
|

मुतकारिब मुसम्मन सालिम फ़ऊलुन फ़ऊलुन फ़ऊलुन…

दर्द मिटा दूँगा
|

  तेरे दर्द को अल्फ़ाज़ दूँगा मत सोच…

दिल ने समझा तुझे ही हल शायद
|

  ख़फ़ीफ़ मुसद्दस मख़बून महज़ूफ़ मक़तू फ़ाएलातुन…

नफ़रत दिलों में अक़्ल पे छाई ग़ुबार है
|

मुज़ारे मुसम्मन अख़रब मकफ़ूफ़ महज़ूफ़ मफ़ऊल…

पंछी   का  उड़  जाना  तय है
|

  फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन   22  …

रवायत 
|

  हमें यूँ तुमको  देखने की आदत…

रोकने को तो खड़ा पूरा ज़माना होगा
|

  रमल मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़ मक़तू फ़ाएलातुन…

वक़्त से आर-पार करता हूँ
|

  ख़फ़ीफ़ मुसद्दस मख़बून महज़ूफ़ मक़तू फ़ाएलातुन…

शमा है एक परवाने बहुत
|

  मुफ़ाईलुन मुफ़ाईलुन फ़अल   1222  …

सुख-दुःख 
|

  दु:ख जो तेरे थे, वो मेरे थे, सुख…

हाथ में अख़बार आया
|

फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन   2122  …

हुस्न वालों से खुले-आम हवा दिल्ली की
|

  रमल मुसम्मन मख़बून महज़ूफ़ मक़तू फ़ाएलातुन…

कवि, स्वर, चित्र और निर्माण: अमिताभ वर्मा

उसका क्या

अमिताभ वर्मा की भावपूर्ण अभिव्यक्ति। उच्चारण से ’क्या’ शब्द के कितने भाव प्रस्तुत हुए—सुनें—उन्हीं…

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इस अंक की पुस्तकें

दिल से ग़ज़ल तक


2. दिल से ग़ज़ल तकः एक…
3. एक ख़ुशगवार सफ़र-दिल से…
4. दिल से ग़ज़ल तक अज़, देवी…
5. मेरी ओर से—दिल से ग़ज़ल…
6. 1. सफ़र तय किया यारो…
7. 2. सागर के तट पे आते…
8. 3. सुन सको तो सुन लो…
9. 4. न जाने क्यों हुई…
10. 5. ज़िन्दगी करना बसर…
11. 6. ग़लत फ़हमी की ईंट छोटी…
12. 7. माफ़ कैसे गुनह हुआ…
13. 8. इल्म होगा उसको फिर…
14. 9. हमसफ़र बिन है सफ़र…
15. 10. ग़म कतारों में खड़े…
16. 11. कहाँ हैं गए सारे…
17. 12. रौशनी की ये नदी…
18. 13. मिट्टी को देके रूप…
19. 14. राज़ की है बात जो…
20. 15. तेरे दर पर टिकी…
21. 16 . शमअ पर वो था जला…
22. 17. ये हमराज़ को उसने…
23. 18. बेवफ़ा से मुलाक़ात…
24. 19. कल जली जो ग़रीबों…
25. 20. वो है रहता ख़फ़ा…
26. 21. होगा विश्वास उन…
27. 22. भीड़ में वो सदा…
28. 23. है ये अनजान सा सफ़र…
29. 24. शायरी इक इबादत है
30. 25. हिफाज़त में हैं…
31. 26. फिर तो सब राज़ होंगे…
32. 27. तेरे मेरे बीच वो…
33. 29. कैसी ख़बरें हैं ये,…
34. 30. बादशाहत है कहीं…
35. 31. क्या करता है तेरी…
36. 32. कहीं सर किसी का…
37. 33. शोर में भी ख़फ़ा…
38. 34. होती बेबस है ग़रीबी…
39. 35. उसे ले आई जो शक्ति,…
40. 36. नया रंग हो नया ढंग…
41. 37.  ईंट-गारा हर तरफ़…
42. 38. जब भी बँटवारे की…
43. 39. क्यों बात को बढ़ा…
44. 40. हैवानियत के सामने…
45. 41. साँसें जो ज़िन्दगी…
46. 42. बने बेवफ़ा राज़दाँ…
47. 43. ख़ुदी आस्माँ को लगी…
48. 45. लिखी बात दिल की…
49. 46. जीत पाने की वजह…
50. 47. चमकती है बिजली यूँ…
51. 48. इश्क में जब वो किसी…
52. 49. वह किसी का भी क़र्ज़दार…
53. 50. लिखा जो तुमने क़लाम…
54. 51. क्या ऐसा कोई किताब…
55. 52. वहीं पे आता उबाल…
56. 53. थरथराया रात भर तेरा…
57. 54. हो न बस में तेरे…
58. 55. तू न था कोई और था…
59. 56. ख़ाली दिल का मकान…
60. 57. इन चरागों को जलना…
61. 58. शीशे के घर में जो…
62. 59. अनकही जो बात दिल…
63. 60. शिल्पी ने तराशी…
64. 61. मिट्टी को देके रूप…
65. 62. कोई बैठा मुझमें…
66. 63. काश उसका भी अपना…
67. 64. नये रंग निस दिन…
69. 66. उजालों की बारात…
70. 67. बारहा उसके घर गया…
71. 68.  मुँह के बल फिर…
72. 69. अँधेरी सी गली में…
73. 70. अपनों की दोस्ती…
74. 71.  मुस्कुराहट मेरी…
75. 72. बाग़ में उनका तो…
76. 73. आईना है दिखा रहा…
77. 74. एक तुम हो एक मैं…
78. 75. नये साल का है आना…
79. 76. ज़रा पत्थरो ध्यान…
80. 77. मुंतशिर हो ज़ेहन…
81. 78. साँस का ईंधन जलाकर…
82. 79. मेरी नब्ज़ छू के…
83. 80. लगती है मन को अच्छी,…
84. 81. दिल से दिल तक जुड़ी…
85. 82.  अनबुझी प्यास रूह…
86. 83. की शायरी भी हमने…
87. 84. दर्द की तानें उड़ायेगी…
88. 85. सिमटती जो जाएगी…
89. 86. जब भी बढ़ता है ग़म…
90. 87. क्या जाने मैंने…
91. 88. ये शाइरी क्या चीज़…
92. 89. है बाग़ बाग़ मिरा…
93. 90. मेरे वतन की ख़ुश्बू 
94. 91. लहू से लिखी वीरता…
95. 92. यूँ अंधेरों में…
96. 93. पहचानता है यारो,…
97. 94. वो ही चला मिटाने…
98. 95.  लोरी सुना रही है,…
99. 96. सुब्हदम तू जागरण…
100. 97. रहमत तेरी ए मौला…
101. 98. बहार आये तो आती…
102. 99. जुदाई में हैं आँखें…
103. 100. क़ुरबान जाँ की जिसने…
104. 101. ‘हम हैं भारत के’…
105. 102. उठो सपूतो देश के…
106. 103. अर्पण कर दें तन…
107. 104. घरौंदे साहिलों…
108. 106. इस देश से ग़रीबी…
109. 107. भूख भी आग के सिवा…
110. 108. दुलारा बापू
111. 109. धरती माँ की लाज
112. 110. भारत मेरा देश महान
113. 111. आज़ादी के परवाने
114. प्रतिक्रियाएँ
क्रमशः

इस अंक के लेखक

विशेषांक

इक्कीसवीं सदी की कहानियाँ

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विशेषांक सूची

डॉ. आरती स्मित (विशेषांक संपादक)

  इक्कीसवीं सदी वैश्विक स्तर पर बहुआयामी बदलाव एवं विकास की जननी के रूप में हमारे सम्मुख आई। विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में जो अद्भुत क्रांति आई, उसने जीवन की गति तेज़ कर दी। कंप्यूटर, इंटरनेट, स्मार्ट फ़ोन, आइ फ़ोन, सोशल मीडिया के कई विकल्पों सहित गूगल और चैट जीपीटी ने विश्व के आम जन को विश्व.. आगे पढ़ें

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