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ISSN 2292-9754

पूर्व समीक्षित
वर्ष: 22, अंक 300, जुलाई प्रथम अंक, 2026

संपादकीय

अंकों के तीन शतक पूर्ण करने पर साहित्य कुञ्ज के प्रेमियों को हार्दिक बधाई!
सुमन कुमार घई

  प्रिय मित्रो, साहित्य कुञ्ज का यह 300वां अंक है। अगर आरम्भ से ही साहित्य कुञ्ज का नियमित प्रकाशन कर पाता, तो अंकों की संख्या कहीं अधिक होती। आरम्भिक दिनों में साहित्य कुञ्ज को मैंने साप्ताहिक रूप से प्रकाशित किया। उन दिनों समस्या यह थी कि भारत में किसी-किसी के पास सरकारी कंप्यूटर की सुविधा थी। कुछ समृद्ध लेखकों या विदेशों में रहने वाले लेखक टाइप करके रचनाएँ भेजते। उन दिनों इंटरनेट पर साहित्यिक लेखकों की प्रिय फ़ाँट ‘शुषा’ था जिसे मैंने भी साहित्य कुञ्ज के लिए अपना लिया। यह फ़ॉन्ट निशुल्क था इसलिए लोकप्रिय भी था। इसमें कुछ कमियाँ थीं। जब मैंने स्व. श्याम त्रिपाठी जी की...

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साहित्य कुञ्ज के इस अंक में

कहानियाँ

अभियोग 
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  समीप के ही एक शहर में मेरे पति के…

आगंतुक
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  यह बरसात भी अभी आई नहीं थी। वर्षा…

कुंती का खेल
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  कुंती को वह खेल अकस्मात्‌ ही…

जब ऋतुएँ रूठने लगीं
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  एक समय की बात है। धरती पर एक बहुत…

दूसरा मौक़ा
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  परिवार न्यायालय के बाहर लगी लंबी…

नोना बेबी ‘पोपोव’
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  जैसे ही कार घर के गेट के भीतर दाख़िल…

पिता का श्राद्ध
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  मैं एक सेमिनार का हिस्सा बनने के…

पिता बरगद की छाया
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  पिता के जाने के बाद घर में सबसे अधिक…

राई-भर मरहम
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  बिजली की तार बेचने वाली अपनी दुकान…

रोबोट की हत्या
|

  सुबह की चाय पीते हुए आर्यन अख़बार…

सन्‌ 1931 में . . .
|

  [मेरी मौसी की क़लम से उनकी यह बीती…

हास्य/व्यंग्य

कूल प्रभु कूल
|

  मैं पराँठों और डाँटों का बहुत शौक़ीन…

आलेख

मदर्स डे
|

  मातृत्व, स्मृति और संस्कृति: एक संस्मरणात्मक…

समीक्षा

गंगा में तैरते मिट्टी के दीये: एक अवलोकन
|

समीक्षित पुस्तक: पुस्तक: गंगा में तैरते मिट्टी के दीये काव्य संग्रह हाइकु,…

तखत की ताकत
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एक मशहूर आलोचक का कहना है, जैसे कहानी को उपन्यास का छोटा स्वरूप नहीं कह…

संस्मरण

नाटक

कविताएँ

अकेलापन
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  छोटा बच्चा था जब मैं  सब प्यार…

अनकहा इज़हार
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  हाँ, मैं लिखता हूँ  सिर्फ़ लिखने…

अपने शब्दों की खोज 
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  मिट रहे हैं शब्द  मिटेंगे अर्थ …

अलग दुनिया 
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  यह एक अलग ही दुनिया है हमारी धरती…

अष्टांग योग गीत
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चित्त की चंचल लहरें रोकें,  अन्तस आलोक…

आँगन की मुस्कान
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  नन्हे-नन्हे पाँव हैं, सपनों की उड़ान। …

उनका हिस्सा
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  चमचमाती गाड़ियाँ चमचमाते लोग उनके…

एक बार फिर मिला जाए
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  कमियाँ कुछ रही होंगी मुझमें भी और…

एक हृदय टूक हुआ
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  एक हृदय टूक हुआ,  एक आहत है…

गंगा दशहरा
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  (जब गंगा स्वर्ग से उतरी थी पृथ्वी…

जीवन की जंग
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  जीवन की जंग लड़ता तन,  पीड़ा से…

टोरोंटो और टिटहरी
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  टोरोंटो में वसंत धीरे-धीरे खुलता…

नन्हे हाथ
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  1 नन्हे-नन्हे हाथ में,  सपनों…

निपिसिंग की साँझ
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  निपिसिंग* के जल पर साँझ जब अपना केसर…

नियति 
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  रख दी सोने की तिजोरी चोरों के दरबार…

प्रेम की अंतिम व्याख्या
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  राधा का प्रेम प्रेम की मधुरतम व्याख्या…

प्रेम-तपिश
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  कहीं दूर, किलिमंजारो के शिखर पर—…

फिर भी
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  बहुत भीड़ है,  फिर भी तपिश अकेलेपन…

बादल हैं पर बूँद नहीं
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  बादल हैं पर बूँद नहीं, कैसी ऋतु की…

बाबू जी: एक स्वर्णिम संकल्प
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  जग में आया हूँ, तो व्यर्थ नहीं जाऊँगा, …

बोला चाँद 
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  एक दिन मैंने देखा ख़्वाब था बिल्कुल…

महाराणा प्रताप
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कुंडलियाँ छंद 1 राणा थे मन से अडिग, थी रजपूती…

मौसम
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  मौसम बदला है बारिश है, ठंडक है न्यूमार्केट…

वह तो झांसी वाली रानी थी
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  सन् अठारह सौ सत्तावन में केवल एक…

विकसित दुनिया के भिखारी
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  वे सिर्फ़ भीख नहीं माँगते हमेशा कभी…

शिक्षा बिंदु
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  प्रेरणा की शिक्षा-बिंदु पर क़त्लेआम…

सुरभित वसन्त 
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  पतझड़ बन गई थी ज़िन्दगी उम्मीदें सब…

सैर
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  शाम का भोजन जीमकर  निकला ज़रा…

हाई पार्क, चेरी ब्लॉसम और बच्चे
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  वसंत ने हाई पार्क में धीरे से खोली…

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शायरी

कवि, स्वर, चित्र और निर्माण: अमिताभ वर्मा

उसका क्या

अमिताभ वर्मा की भावपूर्ण अभिव्यक्ति। उच्चारण से ’क्या’ शब्द के कितने भाव प्रस्तुत हुए—सुनें—उन्हीं…

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इक्कीसवीं सदी की कहानियाँ

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डॉ. आरती स्मित (विशेषांक संपादक)

  इक्कीसवीं सदी वैश्विक स्तर पर बहुआयामी बदलाव एवं विकास की जननी के रूप में हमारे सम्मुख आई। विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्र में जो अद्भुत क्रांति आई, उसने जीवन की गति तेज़ कर दी। कंप्यूटर, इंटरनेट, स्मार्ट फ़ोन, आइ फ़ोन, सोशल मीडिया के कई विकल्पों सहित गूगल और चैट जीपीटी ने विश्व के आम जन को विश्व.. आगे पढ़ें

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