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कोरोना काल की बदलती दुनिया

जब चीन कोरोना की आढ़त लगाये बैठा था और दुनिया के देशों को खुदरा में इसे दे रहा था तब लोग कह रहे थे कि कोरोना काल में सब कुछ बदल सकता है लेकिन दुनिया नहीं बदल सकती। लेकिन आज जब कोरोना का नागिन डांस पूरी दुनिया देख रही है तब उसे पता चल रहा है कि वास्तव में दुनिया बदल चुकी है। जो लोग कभी शराब से परहेज़ करते थे और कहते थे कि मैंने कभी शराब को हाथ नहीं लगाया; वे सत्तर प्रतिशत अल्कोहल से युक्त सेनिटाइज़र लगाकर दिनभर में कई बार हाथ मल रहे हैं। अब कोई यह नहीं कह सकता कि मैंने कभी अल्कोहल को हाथ नहीं लगाया। यहाँ तक कि शादी के जोड़े पहने वर-वधु भी सेनिटाज़र लगाकर मंडप के नीचे बैठ रहे हैं। तबादला होने पर ज़िले के सीनियर अधिकारी पदभार भी सेनिटाज़र लगाकर ग्रहण कर रहे हैं। यहाँ तक कि वे जब अवैध शराब की फ़ैक्ट्रियों में छापेमारी करने जाते हैं, वहाँ कनस्तर में मौजूद शराब को भी उठाने के लिए सेनिटाइज़र लगा रहे हैं। यहाँ तक कि शराब बनाने वाली अवैध फैक्ट्री के मालिक को गिरफतार करने से पूर्व सेनिटाइजर लगाने को कहते और खुद भी उसे पकड़ने पहले अपने हाथों में सेनिटाइजर मल रहे हैं। सड़कों पर दुनिया ऐसी बदली की वाहन चालक यात्रियों के लिए तरस रहे हैं। अगर कोई मिल जाता है तो उस पर ऐसे झटपते हैं जैसे गिद्ध अपने शिकार को देखकर झपटता है। बड़ी दुकानों में जाइये तो ख़रीदार का स्वागत सेनिटाइज़र हाथ में देकर किया जाता है। उसे देखकर ऐसा लगता है जैसे दुकान का मालिक अभी-अभी सत्यनारायण कथा सुनकर बाहर आया हो और ग्राहकों को चरनामृत प्रसाद बाँट रहा हो।

मंदिरों में भगवान को भक्तों के दर्शन नहीं हो रहे हैं। भगवान भी भक्तों के दर्शन के लिए तरस रहे हैं। भक्त हैं कि भगवान के ऑनलाइन दर्शन कर रहे हैं जिसकी भनक भगवान को भी नहीं लग रही है। आख़िर ऐसा हो भी क्यों नहीं भगवान के पास मोबाइल या लैपटाप जो नहीं हैं। थाने में जाइये तो पता चलेगा कि सारा थाना कंटेनमेंट ज़ोन घोषित किया जा चुका है। पुलिस वाले जो रोज़ दूसरों को डराते थे; वे कोरोना के डर से थाना छोड़कर भाग चुके हैं। चोर-उचक्के सोच रहे हैं– अच्छा हुआ सालों को जो थाना छोड़कर भागना पड़ा। एक पुलिस वाले ने तो एक अपराधी को छोड़ने के लिए डिजिटल क्वांइंस तक रिश्वत में माँग ली। बोला, "कोरोना के दौर में कहीं कोई रिश्वत में रुपये लेता है क्या? मुझे तो डिजिटल क्वाइंस चाहिएँ।" कोरोना काल में नेताओं के दर्शन भी नहीं हो रहे हैं। कई राज्यों में सरकार ख़ुद क्वारंटाइन में चली गयी है। मंत्री मुख्यमंत्री से और मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों से मिलने से कतरा रहे हैं। विधायक समस्याओं की गठरी लेकर सड़कों पर घूम रहें हैं। जब जनता उनके समक्ष समस्याएँ रख रही है तो कहते हैं मैंने सरकार को ट्वीट कर दिया है। जब ट्विटर पर आ जायेगा तब पढ़ लेना।

बरसात के दिन हैं। मेरे पड़ोसी के घर में कल साँप निकल आया तो उसने ज़िले के एसपी को फोन लगाया। उधर से जबाव आया साँप का फोटो खींचकर पुलिस की वेबसाइट में डाल दो अभी थाने में कोरोना बैठा है। उसके जाते ही साँप को पुलिस वाले आकर घर से निकाल देंगे। पड़ोसी असमंजस में थे। साँप का फोटो खींचें या घर से उसे बाहर निकालें। बाद में उन्होंने किसी तरह उसे घर से बाहर निकाल दिया। बाद में मुझसे कहने लगे, "लगता है पूरे लोकतंत्र पर कोरोना जड़ जमाये बैठा है। सूली ऊपर सेज पिया की तर्ज़ पर कोरोना ऊपर सेज सरकार की सजी हुई है।"

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