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डॉ. सुषम बेदी की स्मृति में भावपूर्ण ज़ूम श्रद्धांजलि सभा 

दिनांक 15 मई, 2020 को शीर्ष प्रवासी साहित्यकार श्रीमती सुषम बेदी की स्मृति में वैश्विक हिंदी परिवार (वाटस्एप समूह) द्वारा विश्व की विभिन्न संस्थाओं अक्षरम (भारत), वातायन काव्यांजलि (ब्रिटेन), हिंदी राइटर्स गिल्ड (कनाडा), झिलमिल (अमेरीका) के सहयोग से श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में श्रीमती सुषम बेदी जी की स्मृति में साहित्य कुंज द्वारा प्रकाशित वेब अंक का लोकार्पण भी किया गया। कार्यक्रम में उनके परिवार के सदस्यों उनके पति श्री राहुल बेदी, बेटी व अभिनेत्री पूर्वा बेदी व परिवार के अन्य सदस्यों के अतिरिक्त न्यूयार्क में भारत के कौंसलेट जनरल श्री संदीप चक्रवर्ती, विश्व हिंदी सचिवालय के महासचिव श्री विनोद कुमार मिश्र, केंद्रीय हिंदी संस्थान के श्री कमल किशोर गोयनका, वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के श्री श्याम परांडे व नारायण कुमार और कार्यक्रम के आयोजक अनिल जोशी संचालक श्री अनूप कुमार के अतिरिक्त कई विशेष व्यक्तियों ने अपने विचार रखे। इस अवसर पर उनकी स्मृति में बोलने वाले और उनकी कृतियाँ प्रस्तुत करने वालों में कोलंबिया विश्वविद्यालय के श्री राकेश रंजन, सुश्री गैबरिला, सुश्री सोमा व्यास। येल से श्रीमती सीमा खुराना, कनाडा से श्री सुमन घई, डॉ. शैलजा सक्सेना, भारत से अलका सिन्हा, ब्रिटेन से डॉ. पद्मेश गुप्त, मीरा मिश्रा ‘कौशिक‘ सम्मिलित थे। 

कार्यक्रम का प्रारंभ लेखक व इस कार्यक्रम के संयोजक अनिल जोशी ने सुषम जी की कहानी ’अवसान’ को याद करते हुए गीता पाठ से किया। उन्होंने कहा कि सुषम जी का योगदान इतना महत्वपूर्ण है कि उनके द्वारा रचित साहित्य के आधार पर ही प्रवासी साहित्य के प्रतिमान बनाए गए। उनका लेखन स्त्री विमर्श में मील का पत्थर है। कार्यक्रम के संचालक श्री अनूप कुमार ने सुश्री सुषम बेदी से जु़ड़े कई आत्मीय प्रसंगों को याद किया और उनके जाने को अमेरिका के हिंदी साहित्य की बड़ी क्षति बताया। उन्होंने सुषम जी के चित्रों के पावर प्वाईंट प्रस्तुति के माध्यम से उनके व्यक्तित्व के बारे में जानकारी दी। इसके बाद उन्होंने वक्ताओं को बुलाना प्रारंभ किया। 

सभी वक्ता सुषम जी से जुड़ी स्मृतियों के भाव में डूबे हुए थे। सुषम जी के पति श्री राहुल बेदी जी के भाषण को सुन कर सभी की आँखें भर आईं। उन्होंने लेखन और हिंदी के प्रति सुषम जी की निष्ठा को विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से बताया। राहुल जी अपने प्रति लिखी कविता ‘तुम्हारे जाने के बाद’ पढ़ते हुए भावुक हो गए। उन्होंने गीता के एक श्लोक का उद्धृत करते हुए कहा कि सुषम जी के जीवन में वे सभी गुण थे जिनका उल्लेख महिलाओं के संदर्भ में गीता के विभूति योग में है। उन्होंने कहा कि वे उनके जाने के बाद भी सदा हिंदी से जुड़े रहना चाहेंगे। उनकी बेटी और अभिनेत्री पूर्वा बेदी ने भी अपने माँ के असाधारण व्यक्तित्व को याद किया। उनके बेटे वरुण बेदी ने स्मृति-सभा के आयोजन के लिए सबको धन्यवाद देते हुए अपनी माँ के सक्रिय व्यक्तित्व को याद किया। 

सुषम जी के योगदान को याद करते हुए न्यूयार्क में भारत के कौंसलेट जनरल श्री संदीप चक्रवर्ती ने बताया कि वे कोंसलेट के कार्यक्रमों में सदा भागीदारी करती थीं। उन्होंने उनकी भागीदारी के कुछ चित्र भी प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन खुलने पर कांसुलेट में उनकी स्मृति में एक कार्यक्रम रखना चाहेंगे। विश्व हिंदी सचिवालय के महासचिव श्री विनोद कुमार मिश्रा ने कहा वे केवल प्रवासी जगत की ही नहीं बल्कि पूरे हिंदी जगत की महत्वपूर्ण साहित्यकार थीं। उनका जाना हिंदी साहित्य की बड़ी क्षति है। प्रसिद्ध आलोचक श्री कमल किशोर गोयनका ने कहा कि यह उचित ही है कि सुषम जी जैसी वैश्विक पटल पर कहानियाँ रचने वाली लेखिका की स्मृति में यह वैश्विक श्रद्धांजलि सभा हो रही है। उन्होंने कहा कि वे अमेरिका में हिंदी की सबसे महत्वपूर्ण साहित्यकार थीं। अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के महासचिव श्री श्याम परांडे ने उनके व्यक्तित्व और कृतित्व का अभिनंदन करते हुए उनका पुण्य स्मरण किया वहीं अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के मानद निदेशक श्री नारायण कुमार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में ब्रिटेन के सत्येन्द्र श्रीवास्तव, मारिशस के अभिमन्यु अनत, फीजी के श्री जोगिंदर सिंह कँवल और अब सुषम बेदी का जाना प्रवासी साहित्य की बहुत बड़ी क्षति है। वरिष्ठ पत्रकार श्री राहुल देव ने पिछले वर्ष ही भोपाल में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में आत्मीय मुलाक़ात का उल्लेख किया और कहा कि वे असाधारण गुणों से युक्त व्यक्तित्व थीं। कोलंबिया युनिवर्सटी की सुश्री गैबरिएला तो इतनी भाव विभोर हुई कि अपनी स्मृतियों को शब्दरूप में कहते हुए उनका गला रुंध गया। उन्होंने एक कविता के माध्यम से सुषम जी को याद किया। सुश्री सोमा व्यास ने कहा कि वे नए लेखकों का सदा उत्साह बढ़ाती थीं। उनके व्यक्तित्व के विकास में सुषम जी का महत्वपूर्ण योगदान है। इस अवसर पर उनके साथ शिक्षण के क्षेत्र से जुड़े रहे श्री राकेश रंजन और येल युनिवर्सटी की श्रीमती सीमा खुराना ने भी सुषम जी की सहजता और आत्मीय व्यक्तित्व को याद किया। कार्यक्रम में भारत की लेखिका अलका सिन्हा ने सुषम बेदी जी की स्त्री विमर्श से जुड़ी कुछ प्रतिनिधि कविताओं का बहुत सुरुचिपूर्ण पाठ किया, वहीं वातायन यू.के. की अध्यक्ष सुश्री मीरा कौशिक ने सुश्री दिव्या माथुर द्वारा चयनित कविता ‘यादें‘ संवेदनापूर्ण तरीक़े से पढ़ीं।  ब्रिटेन के डॉ. पद्मेश गुप्त ने सुषम बेदी जी को श्रद्धांजलि दी और वैश्विक हिंदी परिवार जैसे समूह की स्थापना के लिए अनिल जोशी जी को बधाई दी और कहा कि इस मंच के कारण से विश्व के सभी प्रमुख हिंदी व्यक्तित्व इस श्रद्धांजलि सभा में एक साथ इकट्ठे हो पाए हैं। 


इस अवसर पर सुश्री सुषम बेदी की स्मृति में ’साहित्य कुंज.नेट’ वेब पत्रिका के विेशेषांक का भी लोकार्पण हुआ। साहित्य कुंज के संपादक श्री सुमन घई ने विशेषांक के बारे में जानकारी देते हुए सुषम जी को याद किया। विशेषांक की अतिथि संपादक डॉ. शैलजा सक्सेना ने अपने साथ उनके संबंधों को याद करते हुए उनके सरल सहज व्यक्तित्व को याद किया। उन्होंने उनके उपन्यास कतरा-दर-कतरा- दुख के संबंध में एक संस्मरण बताते हुए कहा कि सुषम जी ने उन्हें सलाह दी थी कि इसे मत पढ़ना, तुम दुखी होगी। पढ़ कर लगा कि एक बड़े लेखक के रूप में उन्होंने कितने बड़े संसार का दुख सहा। उन्होंने विशेषांक के सभी लेखकों का भी आभार व्यक्त किया। 

कार्यक्रम के अंत में राहुल बेदी जी की बहन नीलम पूरी ने (जो मिशिगन में रहती हैं) ने बताया कि किस तरह सुषम जी उन्हें अपनी ननद नहीं, बहन की तरह मानती थी और उतना ही स्नेह देती थी। सुषम जी की बड़ी बहन उषा तनेजा और उषा जी की पुत्री रश्मि मंगल भी शामिल हुई और उन्होंने बताया कि सुषम जी किस तरह बचपन से ही प्रतिभाशाली रही और परिवार में सब को कितना प्यार करती थीं।

कार्यक्रम में दुनिया भर के 200 से ज्यादा लेखकों / साहित्यकारों / हिंदी प्रेमियों और सुषम जी के परिवार के सदस्यों ने उपस्थित होकर सुषम बेदी जी को श्रद्धांजलि दी।

प्रस्तुतकर्ता- अनिल जोशी

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