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डॉ. वेद मित्र शुक्ल

 

डॉ. वेद मित्र शुक्ल अपने परिवेश से जुड़े अनुभवों को केंद्र में रखते हुए विभिन्न विधाओं में अपने लेखन के साथ सक्रिय हैं। वर्ष 2019 में हिंदी अकादमी दिल्ली से सम्मानित आपका ग़ज़ल संग्रह “जारी अपना सफ़र रहा” और वर्ष 2023 में उ. प्र. भाषा संस्थान द्वारा उत्तर प्रदेश के सबसे बड़े युवा सम्मान श्री गोपाल दास नीरज प्रथम स्मृति सम्मान से छंदबद्ध कविता विधा में सम्मानित हिन्दी सॉनेट संग्रह “एक समंदर गहरा भीतर” आपकी चर्चित कृतियाँ रही हैं। वरिष्ठ साहित्यकार रामदरश मिश्र जी के साहित्य पर आप का विशेष अध्ययन है। इस दृष्टि से आप द्वारा संपादित पुस्तकें जैसे रामदरश मिश्र: सेलेक्टेड पोइट्री, फ़िक्शन एण्ड नॉन-फ़िक्शन (2023 अंग्रेज़ी में), गाँव की आवाज़–रामदरश मिश्र की गाँव केंद्रित कहानियाँ (2022 में), सपनों भरे दिन–रामदरश मिश्र की किशोर केंद्रित कहानियाँ (2020 में), रामदरश मिश्र की लम्बी कविताएँ (2019 में) आदि उल्लेखनीय है। साथ ही, मिश्र जी की रचनाओं के अंग्रेज़ी में अनुवाद, और हिन्दी व अंग्रेज़ी में उनके साहित्य पर अनेक शोध पत्र विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। 

बालसाहित्य में भी आपकी कुछ किताबें हैं जिनमें बालकविता संग्रह “कहावतों की कविताएं” (बालसाहित्य संस्थान अल्मोड़ा से सम्मानित) “बापू से सीखें” (साहित्य अकादमी के हिन्दी बाल-साहित्य पुरस्कार के लिए चयनसमिति द्वारा 2019 में नामित) और भारत की आज़ादी के 75 वर्ष पूरे होने पर अमृत महोत्सव के अवसर पर प्रकाशित “जनजातीय गौरव” नाम से कविता संग्रह उल्लेखनीय हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आप फ़िजी देश में आयोजित बारहवें विश्व हिन्दी सम्मेलन में भारत सरकार के विशेष प्रतिनिधि के रूप में हिन्दी के उन्नयन एवं संवर्धन हेतु प्रतिभाग कर चुके हैं। इससे पूर्व भारतीय साहित्य व संगीत के प्रचार-प्रसार हेतु अमेरिका के विभिन्न शहरों की यात्रा कर चुके हैं। 

उ. प्र. भाषा संस्थान, हिन्दी अकादमी दिल्ली, विद्या भारती संस्कृति शिक्षा संस्थान कुरुक्षेत्र, साहित्यिक संघ वाराणसी, पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति समिति धानक्या, बाल साहित्य संस्थान अल्मोड़ा, नारायणी साहित्य अकादमी दिल्ली आदि संस्थाओं के विशिष्ट सम्मानों से आपको सम्मानित होने का गौरव प्राप्त हुआ है। 

आप केन्द्रीय फ़िल्म प्रमाणन बोर्ड दिल्ली क्षेत्र के सदस्य, भी हैं। जे.ऐन.यू. नई दिल्ली से पश्चिमी व भारतीय भाषा दर्शन में अपना शोध कार्य पूर्ण कर चुके डॉ. शुक्ल संप्रति दिल्ली विश्वविद्यालय के राजधानी कॉलेज में अंग्रेज़ी विभाग से एसोसिएट प्रोफ़ेसर के रूप में जुड़े हुए हैं। 

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