अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई कतआ

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

अपने अपने करम

रोज़ की तरह आज भी स्वामी राम सरूप जी गंगा तट पर अपनी
 Roz kee tarah aaja bhee swami Ram Saroop jee Gangaa taT par apanee
पूजा में लीन थे। पास ही उनका शिष्य मनोहर लाल बैठा हुआ था।
 poojaa mein leen thei. Paas hee uanakaa shishya Manohar Lal baiThaa hua tha.

 

पूजा का ये सिलसिला गुरु शिष्य का रोज़ का नियम था।
Poojaa kaa ye silasila guru shishya ka roz ka niyam tha.

 

एकाएक न जाने क्या हुआ और स्वामी जी का ध्यान तीव्र पीड़ा के
Eka ek na jaane kya hua aur svamee ji ka dhyaan teevr peerhaa ke
 कारण भंग हो गया और उनके मुँह से एकाएक इक चीख निकल गई।
karan(n) bhnag ho gaya aur un ke munh se eka aemi cheekh nikal gaee.
जब उन्हें अपने शरीर का ज्ञान हुआ तो उन्होंने देखा कि एक बिच्छू उनकी
Jab unhen apane shareer ka gyan hua to un hone dekha ki ek bichchhoo un kee
टाँग पर रेंग रहा है। स्वामी जी ने बिच्छू को एक झटका दिया तो वो
 Taang par raing raha hai. Swami jee ne bichchhoo ko ek jhaTaka diya to vo
पानी में गिर गया। पानी में गिरते ही बिच्छू को गंगा की लहरों के थपेड़े
pani mein gir gaya. Pani mein giarte he bichchhoo ko Ganga  ki lahron ke thaperhe
 लगने लगे और वो बाहर आने को ज़ोर से तड़पने लगा। स्वामी जी ने जब
 lagane lage aur wo bahar aane ko zor se tarhap ne laga. Swami ji ne jab
 ये देखा तो अपनी पीड़ा भूलकर तुरन्त बिच्छू को उठा लिया। जैसे ही
 ye dekha to apani  peerhaa bhool kar turant bichchhoo ko uThaa liya. Jaise hee
स्वामी जी ने बिच्छू को अपने हाथों में लिया, उसने बड़ी ज़ोर से हथेली में
swami ji ne bichchhoo ko apane haathon mein liya, us ne barhee zor se hathali mein
डंक मारा। पीड़ा के कारण स्वामी जी का हाथ हिल गया और बिच्छू हाथ से
 Dank mara. Peerhaa ke kaarn(n) Swami ji ka haath hil gaya aur bichchhoo haath se
गिरकर फिर गंगा में जा गिरा और बाहर आने को तड़पने लगा। स्वामी जी
gir kar phir Gangaa mein ja gira aur baahar aane ko tarhap ne laga. Swami ji
ने उसे बचाने के लिए फिर पानी से निकाला। बिच्छू ने बाहर आते ही फिर
 ne use bachane ke liye phir pani se nikala. Bichchhoo ne bahar aate he phir
डंक मारा, स्वामी जी का हाथ फिर हिल गया और बिच्छू फिर पानी में गिर
Dank mara, Swami ji kaa haath phir hil gaya aur bichchhoo phir pani mein gir
गया और बाहर आने को तड़पने लगा। स्वामी जी ने उसे फिर उठाया, बिच्छू
 gaya aur baahar aane ko tarhap ne laga. Swami ji ne use phir uThaya, bichchhoo
ने फिर डंक मारा और पानी में गिर गया, स्वामी जी ने फिर उठाया। ये
ne phir Dank mara aur pani mein gir gaya. Swami ji ne phir uThaayaa. Ye
करम ऐसे ही चलता रहा।

karam aise hee chal aemin.

मनोहर लाल ये सब देख रहा था। उसे लगा कि स्वामी जी का दिमाग
          Manohar lal ye sab dekh raha tha. Use laga ki Swami ji ka dimaag
खराब हो गया है जो बार-बार डंक मारने पर भी बिच्छू की जान बचाते हैं। 
 kharab ho gaya hai jo baar-baar Dank maar ne par bhi bichchhoo ki jaan bachaate hain.
जब उससे रहा न गया तो उसने स्वामी जी से नतमस्तक होकर पूछा कि
Jab us se raha na gaya to us ne Sawmi ji se nat-mastak ho kar poochha ki
गुरुजी आपके हर एहसान का बदला इस दुष्ट ने आपको डंक मारकर चुकाया
guru ji aap ke har ehasan ka badala is dushT ne aap ko Dank maar  kar chukkaya
 फिर भी आपने कोई रोष नहीं दिखाया और इसकी जान बचाने को तैयार हो
 phir bhi aap ne koi rosh naheen dikhaya aur isaki jaan  bacha ne ko taiyaar ho
गए।

 gae.

यह सुनकर स्वामी जी बोले कि मनोहर लाल यह सब हम दोनों के
           Yah sun kar swami ji bole ki Manohar laal! Yah sab ham dono ke
कर्मों का खेल है। मेरा कर्म है जीवन की रक्षा करना और इसका  कर्म है
karmon ka khel hai. Mera  karm hai jeevan ki raksha karana aur isaka  karm hai
डंक मारना। तुमने देख ही लिया कि हम दोनों ने अपने अपने कर्मों का पूरी
Dank maar na. Tum ne dekh he liya ki ham aemin apne apne karmon kaa pooi
तरह से पालन किया है।

tarah se palan kiya hai.
मनोहर लाल, जीवन में ये बिच्छू हमें अलग-अलग रूपों में मिलते हैं। वो
Manohar laal, jeevan mein ye bichchhoo hamen alag-alag roopon mein mil te hain. Vo
कितना ही हम को डंक मारें मगर हमें अपने को सपने में भी उनकी नीचता
 kit na hee ham ko Dank mare  magar haemin apne ko sapne mein bhee un kee neechata 
 तक नहीं ले जाना है। अपनी अन्तर्रात्मा की आवाज़ को सुनो, सब की भलाई
tak naheen le jana hai. Apani antar atma ki awaaz ko suno, saba ki bhalaee
करो और सदा हर किसी में अच्छाई को पहचानो, इस घटना से यही सीख
karo aur sadaa har mein achchhae ko pahachano , is ghaTanaa se yahi seekh
मिलती है।
 milati hai .

Difficult
Words

Meaning

Difficult
Words

Meaning

Difficult
Words

Meaning

Aane

come

Acchai

goodness

Alag-alag 

different

Antar atma

inner soul

Apne

ours

Baar

time

Baithe

Sitting

Bacha ne

to save

Bahar

out 

Bhalai

help

Bhang

broken

Bhool kar

forgot

Bichchoo

scorpian

Bole

said

Cheekh nikal
gai

screamed

Chukaya

returned

Dhayan

 Meditation

Dushta

evil

Dank mara

stung

Dekha

saw

Dekh raha

watching

Dimag kharab
 ho gaya hai

gone crazy

Ek

one

Eka ek

all of a sudden 

Ehsaan

favour

Ghatna

event

Gir gaya

 fell down

Gyan

 knowledge

Haathon main

in hands

Har

every

Hatheli

palm

Hil gaya

moved

Jaan

life

Jab

when

Jaise hi 

As soon as

Jeevan 

life

 Jhatka

shake

Karam 

Deeds

Karan

Reason

Koi

 any

 Karmo ka khel

game of deeds

Kitna 

 how much

Laga

felt

Milte hai

 meet

Munh

 mouth

Na jaane
 kya hua

 don't know
what happened

Nat mastak

bowed head

Neechta

meanness

Paalan kiya
 hai 

 fulfilled

Pahchano

recognize

Pani

water

peerHa

pain

Phir

again

Poocha

asked

 

Raing

crawl

Raksha

protect

 RoopoN

forms

Rosh

anger

Roz

Everyday

Sab ki

every body's

Sapne

in dream

Seekh

lesson

Shareer

body

Shishya

Disciple

Swami ji

Sage

Taang

leg

Tadap ne

squirming/ suffering

Taiyaar 

ready

Tarah

just like

TaT

Beach

 Teevra 

Intense

 Thaperhe

splashes

Turant 

right away

Unhe

him/he

Unhone

he

Unke/unki

 his

Utha 

picked up

Uthaya

picked up

Us se nahi raha gaya

 he could not contain himself

Use

 he

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

17 हाथी
|

सेठ घनश्याम दास बहुत बड़ी हवेली में रहता…

99 का चक्कर
|

सेठ करोड़ी मल पैसे से तो करोड़पति था मगर खरच…

अपना हाथ जगन्नाथ
|

बुलाकी एक बहुत मेहनती किसान था। कड़कती धूप…

अहितकारी सच
|

दो तोते भाई थे। उनका नाम था सल्लू और बल्लू।…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

सांस्कृतिक कथा

कविता

किशोर साहित्य कहानी

लोक कथा

ललित निबन्ध

आप-बीती

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं