अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका कविता-सेदोका महाकाव्य चम्पू-काव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई क़ता सजल

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सांस्कृतिक आलेख सामाजिक चिन्तन शोध निबन्ध ललित निबन्ध हाइबुन काम की बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य सिनेमा चर्चा ललित कला स्वास्थ्य

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा यात्रा वृत्तांत डायरी रेखाचित्र बच्चों के मुख से बड़ों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य लघुकथा बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

पत्र कार्यक्रम रिपोर्ट सम्पादकीय प्रतिक्रिया पर्यटन

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

भारतीय सेना दिवस

 

भारतीय सेना के शौर्य, बलिदान और समर्पण को सम्मान देने के लिए हर साल 15 जनवरी को भारतीय सेना दिवस मनाया जाता है। 1949 में इसी दिन, फ़ील्ड मार्शल के.एम. करिअप्पा भारतीय सेना के पहले भारतीय कमांडर-इन-चीफ बने, जो भारत के सैन्य इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण क्षण था। 

भारतीय सेना देश की सीमाओं की रक्षा करने और देश के अंदर शान्ति और सुरक्षा बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारतीय सेना के जवान अत्यधिक ठंड, गर्मी, रेगिस्तान, पहाड़ों और घने जंगलों जैसी कठिन परिस्थितियों में दिन-रात काम करते हैं। वे देश की सुरक्षा के लिए अपनी जान क़ुर्बान करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। 

भारतीय सेना दिवस पूरे भारत में बड़े गर्व और सम्मान के साथ मनाया जाता है। मुख्य परेड नई दिल्ली में होती है, जहाँ सैनिक अपना अनुशासन, शक्ति और आधुनिक सैन्य उपकरण दिखाते हैं। बहादुर सैनिकों को उनके असाधारण साहस और राष्ट्र के प्रति सेवा के लिए वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है। 

भारतीय सेना आपदा राहत कार्यों में अपनी भूमिका के लिए भी जानी जाती है। बाढ़, भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान, सेना के जवान नागरिकों को भोजन, चिकित्सा सहायता और बचाव सेवाएँ प्रदान करके मदद करते हैं। यह दिखाता है कि भारतीय सेना न केवल देश को बाहरी ख़तरों से बचाती है, बल्कि ज़रूरत के समय लोगों का साथ भी देती है। 

भारतीय सेना दिवस हर नागरिक को एकता, देशभक्ति और हमारे सैनिकों के प्रति सम्मान के महत्त्व की याद दिलाता है। यह युवाओं को ईमानदारी, साहस और समर्पण के साथ राष्ट्र की सेवा करने के लिए प्रेरित करता है। यह दिन भारतीय सेना की निःस्वार्थ सेवा को श्रद्धांजलि है, जो भारत की रक्षा की रीढ़ के रूप में मज़बूती से खड़ी है। 

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

अगर जीतना स्वयं को, बन सौरभ तू बुद्ध!! 
|

(बुद्ध का अभ्यास कहता है चरम तरीक़ों से बचें…

अणु
|

मेरे भीतर का अणु अब मुझे मिला है। भीतर…

अध्यात्म और विज्ञान के अंतरंग सम्बन्ध
|

वैज्ञानिक दृष्टिकोण कल्पनाशीलता एवं अंतर्ज्ञान…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

सामाजिक आलेख

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं