माँ का जन्मदिन
समीक्षा | पुस्तक समीक्षा डॉ. रमन ‘रिद्धि’15 Aug 2025 (अंक: 282, प्रथम, 2025 में प्रकाशित)
समक्षित पुस्तक: माँ का जन्मदिन (कहानी–संग्रह)
लेखिका: अनुष्का शर्मा
प्रकाशक: नोशन प्रेस
मूल्य: हार्ड कवर:₹230.00
पेपर बैक: ₹150.00
वर्ष: 2025
पृष्ठ संख्या: 60
हमारी बचपन की स्मृतियों को ताज़ा कर देने वाला कहानी–संग्रह “माँ का जन्मदिन” लेखिका अनुष्का शर्मा जी का प्रथम बाल कहानी–संग्रह है। जिसे नोशन प्रेस पब्लिकेशन के द्वारा प्रकाशित किया गया है। इस पुस्तक की कहानियाँ गुणवत्ता पूर्ण हैं मानो किसी बग़ीचे में सुंदर–सुंदर पुष्प हों। इस कहानी संग्रह में 13 कहानियाँ हैं और सभी एक से बढ़कर एक हैं जो बच्चों को अच्छी शिक्षा देती हैं और उन्हें सद्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं। बच्चों के कोमल मन में उत्सुकता का बीज होता है उनके सामने जो कुछ आता है वो उसे जल्दी जानना चाहते हैं, सीखना चाहते हैं और फिर वैसा करने का प्रयास भी करते हैं इसलिए बहुत आवश्यक होता है कि उनके सामने अच्छे उदाहरण रखे जाएँ। इस पुस्तक में इस तरह के बहुत से उदाहरण हैं जिससे वो अच्छी आदतों को सीखेंगे।
बच्चों की यह उम्र उनके भविष्य की नींव रखती है एवं सुंदर, सुथरी भाषा का इसमें अहम योगदान होता है। इस पुस्तक की भाषा उसी के अनुरूप है। आज के इस वर्तमान समय में जब बच्चे अधिकतर मोबाइल फोन और ऑनलाइन खेलों में रुचि दिखाते हैं तो माता पिता को चाहिए कि वो उनको किताबों के प्रति प्रेरित करें। जिससे वो सीख सकें और किताबें तो सीखने का बहुत अच्छा माध्यम होती हैं। इन कहानियों से बच्चे विनम्रता सीखते हैं और सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा लेते हैं। हम सभी में बचपन का ज़िन्दा रहना बहुत ज़रूरी है भले ही थोड़ा सा हो, लेकिन ये हम सभी के अंदर होना चाहिए। इसलिए यह पुस्तक सभी उम्र के लिए उपयुक्त है। पाठक इसको पढ़ते–पढ़ते कल्पनाओं के आसमान की सैर करने लगता है। इस पुस्तक की कहानियाँ कुछ न कुछ सीख देती हैं। जैसे:
1. घर के बड़े बुज़ुर्गों का आदर करना चाहिए और क्योंकि उनके पास जीवन का बहुत अनुभव भी होता है तो हमें उनसे सीखना भी चाहिए।
2. हमें अपने जीवन से ख़ुश रहना चाहिए जो भी ईश्वर ने हमें दिया है वह उत्तम है और उसी में बेहतर की कोशिश करनी चाहिए।
3. हमें कभी लालच नहीं करना चाहिए क्योंकि कभी कभी लालच से अपनी ही जान पर बात आ पड़ती है।
4. सभी को मिल–जुलकर साथ रहना चाहिए। अपने समूह से अलग रहने पर दुर्दशा हो जाती है किन्तु यदि साथ मिलकर कोई भी कार्य किया जाए तो उसमें जीत निश्चित रूप से होती है।
5. अच्छी सूझबूझ के साथ मिलकर किसी भी मुश्किल का समाधान मिल सकता है।
इस तरह से इस पुस्तक के अंदर हर कहानी में सीख छुपी हुई है जिससे सीखने के साथ ही जागरूकता भी आएगी। जिससे वो आने वाले समय में एक बेहतर समाज को बनाने की दिशा में सहयोग करेंगे।
माँ का जन्मदिन
समक्षित पुस्तक: माँ का जन्मदिन (कहानी–संग्रह)
लेखिका: अनुष्का शर्मा
प्रकाशक: नोशन प्रेस
मूल्य: हार्ड कवर:₹230.00
पेपर बैक: ₹150.00
वर्ष: 2025
पृष्ठ संख्या: 60
हमारी बचपन की स्मृतियों को ताज़ा कर देने वाला कहानी–संग्रह “माँ का जन्मदिन” लेखिका अनुष्का शर्मा जी का प्रथम बाल कहानी–संग्रह है। जिसे नोशन प्रेस पब्लिकेशन के द्वारा प्रकाशित किया गया है। इस पुस्तक की कहानियाँ गुणवत्ता पूर्ण हैं मानो किसी बग़ीचे में सुंदर–सुंदर पुष्प हों। इस कहानी संग्रह में 13 कहानियाँ हैं और सभी एक से बढ़कर एक हैं जो बच्चों को अच्छी शिक्षा देती हैं और उन्हें सद्मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करती हैं। बच्चों के कोमल मन में उत्सुकता का बीज होता है उनके सामने जो कुछ आता है वो उसे जल्दी जानना चाहते हैं, सीखना चाहते हैं और फिर वैसा करने का प्रयास भी करते हैं इसलिए बहुत आवश्यक होता है कि उनके सामने अच्छे उदाहरण रखे जाएँ। इस पुस्तक में इस तरह के बहुत से उदाहरण हैं जिससे वो अच्छी आदतों को सीखेंगे।
बच्चों की यह उम्र उनके भविष्य की नींव रखती है एवं सुंदर, सुथरी भाषा का इसमें अहम योगदान होता है। इस पुस्तक की भाषा उसी के अनुरूप है। आज के इस वर्तमान समय में जब बच्चे अधिकतर मोबाइल फोन और ऑनलाइन खेलों में रुचि दिखाते हैं तो माता पिता को चाहिए कि वो उनको किताबों के प्रति प्रेरित करें। जिससे वो सीख सकें और किताबें तो सीखने का बहुत अच्छा माध्यम होती हैं। इन कहानियों से बच्चे विनम्रता सीखते हैं और सद्मार्ग पर चलने की प्रेरणा लेते हैं। हम सभी में बचपन का ज़िन्दा रहना बहुत ज़रूरी है भले ही थोड़ा सा हो, लेकिन ये हम सभी के अंदर होना चाहिए। इसलिए यह पुस्तक सभी उम्र के लिए उपयुक्त है। पाठक इसको पढ़ते–पढ़ते कल्पनाओं के आसमान की सैर करने लगता है। इस पुस्तक की कहानियाँ कुछ न कुछ सीख देती हैं। जैसे:
1. घर के बड़े बुज़ुर्गों का आदर करना चाहिए और क्योंकि उनके पास जीवन का बहुत अनुभव भी होता है तो हमें उनसे सीखना भी चाहिए।
2. हमें अपने जीवन से ख़ुश रहना चाहिए जो भी ईश्वर ने हमें दिया है वह उत्तम है और उसी में बेहतर की कोशिश करनी चाहिए।
3. हमें कभी लालच नहीं करना चाहिए क्योंकि कभी कभी लालच से अपनी ही जान पर बात आ पड़ती है।
4. सभी को मिल–जुलकर साथ रहना चाहिए। अपने समूह से अलग रहने पर दुर्दशा हो जाती है किन्तु यदि साथ मिलकर कोई भी कार्य किया जाए तो उसमें जीत निश्चित रूप से होती है।
5. अच्छी सूझबूझ के साथ मिलकर किसी भी मुश्किल का समाधान मिल सकता है।
इस तरह से इस पुस्तक के अंदर हर कहानी में सीख छुपी हुई है जिससे सीखने के साथ ही जागरूकता भी आएगी। जिससे वो आने वाले समय में एक बेहतर समाज को बनाने की दिशा में सहयोग करेंगे।
अन्य संबंधित लेख/रचनाएं
‘शब्द और संस्कृति’- हमारे समय, लोक और संस्कृति का अर्थपूर्ण अवगाहन
पुस्तक समीक्षा | सुशील कुमार‘शब्द और संस्कृति’ (आलोचना-पुस्तक)…
सरोज राम मिश्रा के प्रेमी-मन की कविताएँ: तेरी रूह से गुज़रते हुए
पुस्तक समीक्षा | विजय कुमार तिवारीसमीक्षित कृति: तेरी रूह से गुज़रते हुए (कविता…
'गीत अपने ही सुनें' का प्रेम-सौंदर्य
पुस्तक समीक्षा | डॉ. अवनीश सिंह चौहानपुस्तक: गीत अपने ही सुनें …
‘हिन्दी दलित आत्मकथाएँ : एक मूल्यांकन’ दलित साहित्य का प्रामाणिक दस्तावेज़
पुस्तक समीक्षा | डॉ. कमल कुमारपुस्तक - हिन्दी दलित आत्मकथाएँ : एक मूल्यांकन …
टिप्पणियाँ
कृपया टिप्पणी दें
लेखक की अन्य कृतियाँ
पुस्तक समीक्षा
कविता
विडियो
उपलब्ध नहीं
ऑडियो
उपलब्ध नहीं