अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका कविता-सेदोका महाकाव्य चम्पू-काव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई क़ता सजल

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सांस्कृतिक आलेख सामाजिक चिन्तन शोध निबन्ध ललित निबन्ध हाइबुन काम की बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य सिनेमा चर्चा ललित कला स्वास्थ्य

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा यात्रा वृत्तांत डायरी रेखाचित्र बच्चों के मुख से बड़ों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य लघुकथा बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

पत्र कार्यक्रम रिपोर्ट सम्पादकीय प्रतिक्रिया पर्यटन

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

मानवाधिकार दिवस: स्वतंत्रता समानता और न्याय का संदेश

 

मानवाधिकार दिवस प्रत्येक वर्ष 10 दिसंबर को विश्व भर में मनाया जाता है। यह दिन संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा 1948 में अपनाई गई सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा पत्र की याद दिलाता है, जो सभी मनुष्यों को जन्मजात अधिकार प्रदान करता है। इसमें 30 अनुच्छेदों के माध्यम से जीवन, गरिमा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सुनिश्चित की गई है। 

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद न्याय की शुरूआत:

द्वितीय विश्व युद्ध की भयावहताओं, जैसे होलोकॉस्ट और नरसंहार, ने वैश्विक स्तर पर न्याय की नई व्यवस्था की माँग को जन्म दिया। मित्र राष्ट्रों—अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्राँस और सोवियत संघ ने 1945 में नूर्नबर्ग में अंतरराष्ट्रीय सैन्य न्यायाधिकरण (IMT) की स्थापना की, जो युद्ध अपराधियों को व्यक्तिगत रूप से दंडित करने का पहला मॉडल बना। 

इन मुक़द्दमों ने 1948 में संयुक्त राष्ट्र की सार्वभौमिक मानवाधिकार घोषणा-पत्र की नींव रखी, जो व्यक्तिगत गरिमा और समानता पर आधारित न्याय प्रणाली का प्रतीक बनी। नूर्नबर्ग सिद्धांतों को संयुक्त राष्ट्र ने बाध्यकारी क़ानून माना, जिससे अंतरराष्ट्रीय अपराधी अदालत (ICC) जैसे संस्थानों का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह शुरूआत आधुनिक मानवाधिकार युग की नींव साबित हुई। 

मानवाधिकार दिवस: 30 अनुच्छेदों का सार:

मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा-पत्र में 30 अनुच्छेद हैं जो सभी मनुष्यों को स्वतंत्रता, समानता और गरिमा प्रदान करते हैं। अनुच्छेद 1 हर व्यक्ति को जन्म से समान अधिकार देता है, जबकि अनुच्छेद 3 जीवन, स्वतंत्रता और व्यक्तिगत सुरक्षा की गारंटी करता है। ये अधिकार भेदभाव, ग़ुलामी और यातना से मुक्ति सुनिश्चित करते हैं। 

प्रमुख अनुच्छेदों की सूची:

  • अनुच्छेद 1-5: स्वतंत्रता, समानता, जीवन का अधिकार, ग़ुलामी और यातना से मुक्ति। 

  • अनुच्छेद 6-12: क़ानूनी मान्यता, समान संरक्षण, गोपनीयता और निष्पक्ष सुनवाई। 

  • अनुच्छेद 13-17: आवागमन स्वतंत्रता, शरण, राष्ट्रीयता, विवाह और सम्पत्ति का अधिकार। 

  • अनुच्छेद 18-24: विचार धर्म स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति, सभा, रोज़गार और अवकाश। 

  • अनुच्छेद 25-30: जीवन स्तर, शिक्षा, सांस्कृतिक भागीदारी और समुदाय कर्त्तव्य। 

मानवाधिकार दिवस 2025 की थीम:

मानवाधिकार दिवस 2025 की आधिकारिक थीम “मानवाधिकार, हमारी दैनिक आवश्यकताएँ” (Human Rights, Our Everyday Essentials) है। यह थीम मानवाधिकारों को रोज़मर्रा के जीवन का अभिन्न अंग बताती है, जैसे सुरक्षा, सम्मान, समानता और स्वतंत्रता, जो हर व्यक्ति की मूलभूत ज़रूरत हैं। 

“मानवाधिकार हर इंसान का जन्मसिद्ध अधिकार है; इनकी रक्षा हम सबकी साझा ज़िम्मेदारी। आइए, एक न्यायपूर्ण समाज का संकल्प लें।”

“समानता का सपना साकार हो, जब हर दिल में न्याय का दीप जले। मानवाधिकार दिवस हमें प्रेरित करे, भेदभाव को मिटाने को।” 

“जैसा नेल्सन मंडेला ने कहा, ‘कोई भी स्वतंत्र नहीं है जब तक सभी स्वतंत्र न हों।’ यह दिवस हमें एकजुट होने का संदेश देता है।”

दिव्याना 
11वीं कक्षा की छात्रा
राजकीय उत्कृष्ट वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला गाहलियां
कांगड़ा हिमाचल प्रदेश

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

अगर जीतना स्वयं को, बन सौरभ तू बुद्ध!! 
|

(बुद्ध का अभ्यास कहता है चरम तरीक़ों से बचें…

अणु
|

मेरे भीतर का अणु अब मुझे मिला है। भीतर…

अध्यात्म और विज्ञान के अंतरंग सम्बन्ध
|

वैज्ञानिक दृष्टिकोण कल्पनाशीलता एवं अंतर्ज्ञान…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

सामाजिक आलेख

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं