डेटा, डिज़िटल अर्थव्यवस्था का नया तेल है—बालेन्दु शर्मा दाधीच
विश्व समाचार 18 Jun 2024
ग्रेटर नोएडा (भारत), 17 जून, 2024: केंद्रीय हिंदी संस्थान, विश्व हिंदी सचिवालय, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद और भारतीय भाषा मंच के तत्त्वावधान में वैश्विक हिंदी परिवार ने दिनांक: 16 जून 2024 को एक विशेष संगोष्ठी का ऑनलाइन आयोजन किया। इस संगोष्ठी में चर्चा का विषय था ‘कंप्यूटर और भाषा कार्यशाला: तकनीक की दुनिया में डेटा का रहस्यजाल’। उल्लेख्य है कि वैश्विक हिंदी परिवार, भाषा और विशेषतया हिंदी भाषा तथा इसके साहित्य के वैश्विक रूप से प्रचार-प्रसार के लिए स्वयंसेवी आधार पर एक अभियान को आंदोलन के रूप में परिवर्तित करने के लिए संकल्पित है। इसी संकल्प से अभिमंत्रित होकर यह संस्था हिंदी के विस्तारीकरण के लिए इसे अधुनातन तकनीक से जोड़ने के लिए प्रयासरत है तथा इसके कंप्यूटरीकरण की संभावनाओं पर विद्वानों के सुझावों और विचारों का साझा कर रही है।
दिनांक: 16 जून को आयोजित संगोष्ठी में ऐसे वक्ताओं को मंच पर आमंत्रित किया गया जिनकी इस महत्त्वपूर्ण विषय पर गहरी पैठ है एवं जिनके विचारों से हिंदी के कंप्यूटरीकरण की अभिकल्पना को मूर्त रूप प्रदान किया जा सकता है। इस कार्यक्रम के मुख्य वक्ता थे, बालेंदु शर्मा दाधीच जो संप्रति भारत के माइक्रोसॉफ़्ट के निदेशक हैं। वह हिंदी के एक लब्धप्रतिष्ठ साहित्यकार भी हैं।
संगोष्ठी के स्वागत भाषण में हिंदी के प्रखर विद्वान डॉ. जयशंकर यादव ने कार्यक्रम की रूपरेखा बताते हुए इसके मुख्य वक्ता श्री बालेंदु शर्मा और सह-वक्ताओं नामत: डॉ. राजेश गौतम, डॉ. राज कुमार शर्मा, डॉ. आदित्य झा तथा डॉ. ओम प्रकाश बैरवा का परिचय दिया। तदनंतर, मंच संचालक डॉ. सुरेश कुमार मिश्र ‘उरतृप्त’ ने कहा कि वैश्विक हिंदी परिवार के अध्यक्ष श्री अनिल शर्मा जोशी के सघन प्रयासों से इस प्रकार की संगोष्ठियों का आयोजन सम्भव हो पाता है।
कंप्यूटर और प्रौद्योगिकी के विशेष जानकार, श्री बालेंदु शर्मा ने कंप्यूटर तथा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रचुरता से प्रयुक्त डेटा के महत्त्व को रेखांकित करते हुए कहा कि डेटा, डिज़िटल अर्थव्यवस्था का तेल है, अर्थात् आज के दौर में डेटा का महत्त्व पेट्रोलियम से भी ज़्यादा है। डेटा के बदौलत ही आर्टीफ़िशियल इंटेलीजेंस छलाँग मार रहा है। गूगल, ऐमज़न, माइक्रोसॉफ़्ट जैसी कंपनियों का महत्त्व समृद्ध डेटा के ज़रिए ही बढ़ता जा रहा है। उन्होंने भारत-चीन के बीच तनावपूर्ण सम्बन्धों का उल्लेख करते हुए बताया कि डेटा का सामरिक महत्त्व भी है। यह वैश्विक प्रभाव का स्रोत है। डेटा की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि भी है; कोई 20,000 वर्षों पहले की पीढ़ियाँ भी किसी न किसी रूप में डेटा संसाधित करती रही हैं जिनका प्रयोग खेती, कर वसूली, उत्पादन आदि के क्षेत्र में किया जाता रहा है। श्री बालेंदु के वक्तव्य के मध्य प्रतिक्रिया करते हुए डॉ. विजय कुमार मल्होत्रा ने डेटा और सूचना के बीच अंतर्सम्बन्धों का उल्लेख किया। डेटा की क्षमता को महत्त्वांकित करते हुए बताया गया कि आज 1 मिनट में 40 लाख पोस्टें की जाती हैं जिनसे डेटा का सतत विस्तार होता जा रहा है। श्री बालेंदु ने इसके नकारात्मक पक्ष के सम्बन्ध में बताया कि डेटा से निजता अर्थात् प्राइवेसी का ख़तरा भी बढ़ता जा रहा है। डेटा में हर व्यक्ति की जानकारी छिपी होती है।
बीच वक्तव्य में, दिल्ली विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर, डॉ. राजेश गौतम ने कहा कि आज डेटा के द्वारा मूल्यवान सूचनाओं की गोपनीयता को बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गई है। वैसे तो डेटा हमें आत्मविश्वास से लबरेज़ कर देता है किन्तु इस पर निर्भरता ख़तरनाक़ है। गुरु नानक देव कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफ़ेसर राज कुमार शर्मा ने बताया कि यों तो डेटा ने हमारे जीवन को आसान बना दिया है तथापि भारत की 85% आबादी साइबर क्राइम की शिकार हो रही है। इसी बीच, डॉ. आदित्य झा ने श्री बालेंदु से अपने कुछ प्रश्नों का स्पष्टीकरण माँगते हुए पूछा कि क्या डेटा हमें प्रभावित कर रहा है या हम डेटा को प्रभावित कर रहे हैं। उन्होंने डेटा की सीमाओं के बाबत भी प्रश्न किया जिसका श्री बालेंदु ने संतोषजनक समाधान प्रस्तुत किया। तदनंतर डॉ. ओमप्रकाश बैरवा ने अनुवाद, हिंदी भाषा, राजभाषा आदि से सम्बन्धित कंप्यूटरीकरण के बारे में कुछ बिंदुओं पर अपने विचार रखे। उन्होंने भारत सरकार में डेटा को सुरक्षित रखने के उपायों के बारे में जानना चाहा तो श्री बालेंदु ने बताया कि डेटा को डिलीट भी किया जा सकता है; अस्तु, माइक्रोसॉफ़्ट कंपनी हमारी प्राइवेसी की सुरक्षा करती है। मंच पर उपस्थित श्री वी.आर. जगन्नाथ ने बताया कि भाषा स्वयं डेटा है। संगोष्ठी को अपना सान्निध्य प्रदान कर रहे रेल मंत्रालय में राजभाषा के निदेशक श्री वरुण कुमार ने श्री बालेंदु के समृद्ध वक्तव्य को सभी के लिए अत्यंत उपयोगी घोषित किया। वैश्विक हिंदी परिवार के अध्यक्ष श्री अनिल जोशी ने इस संगोष्ठी को अपने बहुमूल्य विचारों से अनुप्राणित करने वाले श्री बालेंदु शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया।
संगोष्ठी का विधिवत समापन करते हुए श्री राजीव रावत ने प्रतिभागी चर्चाकारों तथा श्रोता-दर्शकों के प्रति वैश्विक हिंदी परिवार की ओर से आभार प्रकट किया। इस प्रबुद्ध श्रोतावृन्द में टोमियो मिज़ोकॉमी (जापान), शिखा रस्तोगी (थाईलैंड), दिव्या माथुर (इंग्लैंड), डॉ. ल्यूदमिला खोखलोवा (रूस), डॉ. शैलजा सक्सेना (कैनेडा), डॉ. महादेव कोलूर, डॉ. मोक्षेंद्र, डॉ. वंदना मुकेश, डॉ. अरुणा अजितसरिया, डॉ. ओम प्रकाश, जे. आत्माराम, सच्चिदानंद कालेकर, सुनीता पाहूजा, डॉ. चम्पा मसीवाल, विजय नागरकर, विनयशील चतुर्वेदी, दिलीप कुमार सिंह, ए.के. साहू, डॉ. रश्मि वार्ष्णेय, अमित निश्छल, अपेक्षा पाण्डेय, अभिषेक प्रकाश, उमेश प्रजापति, वेंकेटेश्वर राव वनमा, विभावरी गोरे, श्रेया जगदीशन, स्मिता श्रीवास्तव, सुप्रिया, चंदन उपाध्याय, आशा, कृष्ण कुमार, आशा बर्मन, अठिला कोठालवाला, आनंदकृष्ण, आदित्यनाथ तिवारी, राहुल श्रीवास्तव, राजेश गौतम, समीर, सरोजिनी प्रीतम, सौरभ आर्य, महाबुबली ए नदफ, पूजा अनिल, राज कुमार शर्मा, किरण खन्ना, जीतेंद्र चौधरी आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही।
(प्रेस रिपोर्ट-डॉ. मनोज मोक्षेंद्र)
कंप्यूटर और भाषा कार्यशाला: तकनीक की दुनिया में डेटा का रहस्यजाल
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