मयंक शर्मा – सवैया – किशोरी छवि वर्णन
काव्य साहित्य | कविता-मुक्तक मयंक शर्मा1 Feb 2026 (अंक: 293, प्रथम, 2026 में प्रकाशित)
कंचन हार हमेल लसै मुख, भानुलली सम चन्द-चकोरी,
कानन कुंडल हेम डुलैं, लटकै दुपटी रबि तेज अहोरी,
नैनन-कंज कि देह धरैं, पुनि नेह करैं द्युति भानुकिशोरी,
नंद के नंदन प्राण-बरे जब भानुसुता उर देखि-निहोरी।
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