पंछी का उड़ जाना तय है
शायरी | ग़ज़ल शैली भागवत ‘आस’1 May 2026 (अंक: 296, प्रथम, 2026 में प्रकाशित)
फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन फ़ेलुन
22 22 22 22
पंछी का उड़ जाना तय है
सबका एक बहाना तय है
तय है अगर किसी का आना
तो फिर उसका जाना तय है
अगर भरोसा तोड़ दिया तो
मन से भी गिर जाना तय है
आप इरादा कर बैठे हो
फिर तो मंज़िल पाना तय है
मेरा-तेरा, सबका इक दिन
मिट्टी में मिल जाना तय है
ग़म हैं, आँसू भी हैं तो फिर
रोना तय, मुस्काना तय है
‘आस’ बड़ी है जीने की पर
मौत का इक दिन आना तय है
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