हाथ में अख़बार आया
शायरी | ग़ज़ल शैली भागवत ‘आस’1 May 2026 (अंक: 296, प्रथम, 2026 में प्रकाशित)
फ़ाएलातुन फ़ाएलातुन
2122 2122
हाथ में अख़बार आया
खार से भरमार आया
यूँ समझते ही तुझे माँ
मन भरा, आभार आया
बेबसी करती है बेबस
आदमी लाचार आया
काम कल जो टाल डाला
आज बनकर भार आया
ख़्वाहिशें कंधों पे टाँगें
शहर में बेकार आया
आबरू जब लुट गयी तो
देखने संसार आया
प्यार के बंधन तले बस
झूठ का व्यापार आया
अन्य संबंधित लेख/रचनाएं
टिप्पणियाँ
कृपया टिप्पणी दें
लेखक की अन्य कृतियाँ
ग़ज़ल
विडियो
उपलब्ध नहीं
ऑडियो
उपलब्ध नहीं