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वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी के ग्रेजुएट्स

 

​आजकल अगर कोई संस्थान सबसे जल्दी डिग्री देता है, तो वह है ‘वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी’। यहाँ प्रवेश के लिए किसी योग्यता की ज़रूरत नहीं है, कोई फ़ीस नहीं है और परीक्षा तो बिलकुल भी नहीं। बस, सुबह उठकर वॉट्सऐप पर आएँ, मैसेज पढ़िए और आप एक ही दिन में डॉक्टर, वैज्ञानिक, अर्थशास्त्री, राजनीतिक विश्लेषक या क्रिकेट एक्सपर्ट बन जाएँगे। 

वॉट्सऐप पर आए हर मैसेज को सच मानने वालों की एक पूरी जमात खड़ी हो गई है। हमारे पड़ोस में रहने वाले एक भाई तो इस यूनिवर्सिटी के ‘गोल्ड मेडलिस्ट’ हैं। एक सुबह वह मिलते ही वह बोले, “रोज़ ख़ाली पेट गर्म पानी में नींबू डालकर पीने से सात दिन में पेट की सारी चर्बी ग़ायब हो जाती है।”

मैंने पूछा, “क्या आपने आज़माया है?”

वह बोले, “नहीं, पर मैसेज में लिखा था तो सच ही होगा ना।”

मेरे एक परिचित तो सुबह 25 मैसेज फ़ॉरवर्ड किए बिना नाश्ता भी नहीं करते। एक बार उन्होंने ग्रुप में मैसेज भेजा, “कल रात 12 बजे पृथ्वी पर भयंकर कास्मिक रेडिएशन आने वाला है, इसलिए मोबाइल बंद रखें।” अगले दिन पता चला कि वह महाशय यह मैसेज पिछले कई महीनों से हर महीने फ़ॉरवर्ड कर रहे हैं। 

राजनीति के संदेशों में तो इस यूनिवर्सिटी के छात्र ऐसे विश्वास करते हैं, जैसे सीधे न्यूज़ डिबेट से एक्सपर्ट बनकर आए हों। “मेरे पास पक्की ख़बर है कि कैबिनेट की सीक्रेट मीटिंग में पेट्रोल की गाड़ियाँ बंद करने का फ़ैसला ले लिया गया है, इसलिए सब गाड़ियाँ बेच दो।” बाद में पता चला कि भाई ख़ुद अपनी साइकिल पर घूम रहे हैं। 

फ़ॉरवर्ड करने की बीमारी

इस यूनिवर्सिटी के छात्रों का नियम है, “विचार मत करो, फ़ॉरवर्ड करो।” जैसे ही मैसेज आया, तुरंत फ़ॉरवर्ड। अगर ‘Forwarded many times’ लिखा हो, तो उनका विश्वास और बढ़ जाता है कि, “अरे, इतने सारे लोग बोल रहे हैं तो सच ही होगा।” ‘फैक्ट चेक‘ (Fact Check) जैसा शब्द तो उनकी डिक्शनरी में है ही नहीं।

बॉलीवुड की गपों का तो मज़ा ही अलग है। हमारी सोसाइटी के वॉट्सऐप ग्रुप में एक महिला रोज़ नए ख़ुलासे करती हैं। “अमुक एक्टर का तलाक़ होने वाला है”, “जिस एक्टर को हम कुँवारा समझते हैं, वह सालों से शादीशुदा है।” जब मैंने उनसे पूछा कि आपको यह सब कहाँ से पता चलता है, तो उन्होंने कहा, “मेरे अंकल मुंबई फ़िल्म इंडस्ट्री से सालों से जुड़े हैं, वह मुझे ऐसी गुप्त ख़बरें भेजते रहते हैं।” संक्षेप में कहें तो, चाचा और भतीजी दोनों ही भ्रम में जी रहे हैं। 

क्रिकेट के मामले में तो ये लोग बीसीसीआई (BCCI) को भी हिला देते हैं। मैच शुरू होने से पहले मैसेज आता है, “यह मैच फ़िक्स है और रिज़ल्ट भी तय है।” जब पूछो कि “आपको कैसे पता?” तो कहते हैं, “कंट्रोल बोर्ड से सीधा वॉट्सऐप पर मैसेज आया है।” और अगर उनकी बात ग़लत निकली, तो तुरंत नया मैसेज तैयार, “मैसेज आया है कि आख़िरी मिनट में पूरा प्लान बदल दिया गया है।”

मज़ा तो तब आता है, जब आप इन ‘शूरवीरों’ से कहें कि “यह सब झूठ है।” वे तुरंत आपको वॉट्सऐप पर आया कोई दूसरा बेतुका मैसेज दिखाकर आपको ही ग़लत साबित कर देंगे। 

अंत में बात बस इतनी है कि वॉट्सऐप बुरा नहीं है, लेकिन उस पर आने वाले हर मैसेज को सच मानना ग़लत है। मैसेज आए तो उसे पढ़िए, लेकिन अपनी बुद्धि का उपयोग भी कीजिए। हर बात को सच न मानें। वॉट्सऐप यूनिवर्सिटी में भले ही पढ़ें, लेकिन साथ में ‘समझदारी के स्कूल’ और ‘कामन सेंस के कॉलेज’ भी जाते रहें। वरना आप भी ऐसे 'वॉट्सऐपिया एक्सपर्ट' बन जाएँगे जिसे दुनिया सलाह के लिए नहीं, बल्कि मज़ाक़ के लिए याद रखेगी। 

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