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अभिषेक मिश्रा

 

जन्म: 2003, चकिया, बैरिया, बलिया (उत्तर प्रदेश), भारत
शिक्षा: स्नातकोत्तर (एम। कॉम), सतीश चन्द्र कॉलेज, बलिया
पेशा: कवि, लेखक, आलोचक
विधा: कविता, उपन्यास, कहानी, निबन्ध, गीत
प्रमुख कृतियाँ:

प्रकाशन:

रचनात्मक दृष्टि:
अभिषेक मिश्रा मानते हैं कि साहित्य केवल भावनाओं की अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि “समाज का दर्पण और परिवर्तन की प्रेरणा” है। उनकी क़लम कभी पिता के आँसुओं में डूब जाती है, कभी बेटी के सपनों में उड़ान भरती है, कभी किसानों और मज़दूरों की आवाज़ बनती है, तो कभी सैनिकों की शहादत का गीत गाती है। उनकी कविताएँ और रचनाएँ “आँसुओं की संवेदना, सपनों की उड़ान और समाज की सच्चाई” का संगम हैं, जो पाठक के दिल और मन पर सीधे असर डालती हैं। 

हर दौर में एक आवाज़ होती है, जो भीड़ से अलग सुनाई देती है। 
हर पीढ़ी में एक क़लम होती है, जो समय की धड़कनों को लिख देती है। 
आज के हिंदी साहित्य में वह क़लम है— अभिषेक मिश्रा। 

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  1. डिजिटल डिप्रेशन: एक नई महामा