अन्तरजाल पर
साहित्य-प्रेमियों की विश्राम-स्थली

काव्य साहित्य

कविता गीत-नवगीत गीतिका दोहे कविता - मुक्तक कविता - क्षणिका कवित-माहिया लोक गीत कविता - हाइकु कविता-तांका कविता-चोका महाकाव्य खण्डकाव्य

शायरी

ग़ज़ल नज़्म रुबाई कतआ

कथा-साहित्य

कहानी लघुकथा सांस्कृतिक कथा लोक कथा उपन्यास

हास्य/व्यंग्य

हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी हास्य व्यंग्य कविता

अनूदित साहित्य

अनूदित कविता अनूदित कहानी अनूदित लघुकथा अनूदित लोक कथा अनूदित आलेख

आलेख

साहित्यिक सामाजिक शोध निबन्ध ललित निबन्ध अपनी बात ऐतिहासिक सिनेमा और साहित्य रंगमंच

सम्पादकीय

सम्पादकीय सूची

संस्मरण

आप-बीती स्मृति लेख व्यक्ति चित्र आत्मकथा डायरी बच्चों के मुख से यात्रा संस्मरण रिपोर्ताज

बाल साहित्य

बाल साहित्य कविता बाल साहित्य कहानी बाल साहित्य नाटक बाल साहित्य आलेख किशोर साहित्य कविता किशोर साहित्य कहानी किशोर साहित्य लघुकथा किशोर हास्य व्यंग्य आलेख-कहानी किशोर हास्य व्यंग्य कविता किशोर साहित्य नाटक किशोर साहित्य आलेख

नाट्य-साहित्य

नाटक एकांकी काव्य नाटक प्रहसन

अन्य

रेखाचित्र कार्यक्रम रिपोर्ट

साक्षात्कार

बात-चीत

समीक्षा

पुस्तक समीक्षा पुस्तक चर्चा रचना समीक्षा
कॉपीराइट © साहित्य कुंज. सर्वाधिकार सुरक्षित

इंतज़ार

जो तैश में कर दे तर्रार, 
वो है इंतज़ार!
गर आने वाल हो महबूब...
तो सुहाता है इंतज़ार!!
तन्हाई में भी अक्स उसी का,
दिखलाता है इंतज़ार।
क्या होगा जब मिलेगी नज़र,
सोचवाता है इंतज़ार।
पहला जुमला प्यार का
कहलाता है इंतज़ार।
क्या रंग पहना होगा उसने,
झलक दिखलाता है इंतज़ार।
किस इत्र का भाग्य जागा होगा आज,
ये महकाता है इंतज़ार।
लबों की भीगी नमी का अहसास,
कराता है इंतज़ार।
हो पल भर का विलम्ब उसके आने में,
...तो डराता है इंतज़ार।
रुस्वाई से बेवफ़ाई तक का मंज़र,
दिखलाता है इंतज़ार।
वो ना मिली तो दोजख़ का शगल,
महसूस कराता है इंतज़ार।
पर जब वो आती है,
हर शुबह काफूर कराता है इंतज़ार।
उसके आने पर जो उठी है महक,
उसका हकदार है इंतज़ार।
बार-बार जो होता है मोहब्बत का इक़रार
उसके पीछे भी है वो लम्बा इंतज़ार।
इंतज़ार के इस काफिए में
जो छिपा है वो है प्यार!
इंतज़ार की बेचैनी जो मिटा दे
वो है प्यार!
इंतज़ार के इम्तेहान को सिखा दे
वो है प्यार!
इंतज़ार का भी इंतज़ार करा दे
वो है प्यार!
इंतज़ार से भी मोहब्बत करा दे
वो है प्यार!
इंतज़ार में जीना सिखा दे
वो है प्यार!
 

अन्य संबंधित लेख/रचनाएं

'जो काल्पनिक कहानी नहीं है' की कथा
|

किंतु यह किसी काल्पनिक कहानी की कथा नहीं…

2015
|

अभी कुछ दिनों तक तारीख़ के आख़िर में भूलवश…

2016
|

नये साल की ख़ुशियों में मगन हम सब अंजान हैं…

टिप्पणियाँ

कृपया टिप्पणी दें

लेखक की अन्य कृतियाँ

कविता

विडियो

उपलब्ध नहीं

ऑडियो

उपलब्ध नहीं