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एकात्म के लिए

अधर चुप रहते हैं
आँखें खुली
पर
मौन।

 

आत्मा साधती है -
अलौकिक आत्म-संवाद
पर से एकात्म के लिए

 

सम्पूर्ण देह
पृथ्वी की तरह
सृष्टी करती है - प्रकृति का,
                            प्रकृति में,
                            प्रेम का
                            अनश्वर
                            और
                            अहर्निश।

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