कच्चा पक्का मकान था अपना
शायरी | ग़ज़ल चाँद शुक्ला 'हदियाबादी'1 Mar 2019
कच्चा पक्का मकान था अपना
फिर भी कुछ तो निशान था अपना
मैं था और साथ मेरी तन्हाई
सिर्फ़ माज़ी था दरमियान अपना
तुम भी थे साथ और ज़माना भी
एक कड़ा इम्तिहान था अपना
क्यों न उसको पुकारता या रब
सूना सूना जहान था अपना
"चाँद" था और ख़ला की वीरानी
एक फ़क़त आस्मान था अपना
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